हालांकि इसने यह भी कहा कि विभिन्न मापदंडों के आधार पर मोबाइल ऐप्स से 15 से 30 प्रतिशत सेवा शुल्क वसूलने में गूगल ने कोई उल्लंघन नहीं किया था। ट्रिब्यूनल के प्रमुख न्यायमूर्ति अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा की दो-सदस्यीय पीठ ने कहा कि कुछ धाराओं में गूगल का उल्लंघन साबित नहीं हुआ, लेकिन उल्लंघन के सबूत पर जुर्माना लगाया जा सकता है। एनसीएलएटी के मुताबिक इस आदेश के पैरा 105 में निहित गणना के अनुरूप गूगल पर लगाया गया जुर्माना संशोधित किया गया है। इस तरह पिछले तीन वर्षों के कारोबार के लिए गूगल पर लगाए गए 936.44 करोड़ रुपये के जुर्माने को संशोधित कर 216.69 करोड़ रुपये किया गया है।
ट्रंप के टैरिफ से पहले अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी गूगल को भारी राहत! घट गया जुर्माना, क्या है मामला
नई दिल्ली: अपीलीय न्यायाधिकरण NCLAT ने अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी गूगल पर लगाए गए जुर्माने को घटा दिया। कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने गूगल पर प्ले स्टोर पॉलिसी के जरिए अपनी दबदबे वाली स्थिति का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। NCLAT ने CCI के फैसले को सही तो माना, लेकिन जुर्माने की रकम 936.44 करोड़ रुपये से घटाकर 216 करोड़ रुपये कर दी। एनसीएलएटी ने शुक्रवार को प्रतिस्पर्धा आयोग सीसीआई के इस निष्कर्ष को बरकरार रखा कि कंपनी की ऐप स्टोर नीति डेवलपरों के लिहाज से अनुचित और प्रतिबंधात्मक है। हालांकि एनसीएलएटी ने सीसीआई की तरफ से गूगल पर लगाए गए 936.44 करोड़ रुपये के जुर्माने में भारी कटौती कर 216 करोड़ रुपये कर दिया। एनसीएलएटी ने 104 पन्नों के अपने आदेश में कहा कि गूगल ने बाजार में अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग किया है और कानून की धारा का उल्लंघन किया है।











