गाजियाबाद में गजब सीन पैसा पटना के बृजमोहन ने दिया, रजिस्ट्री दिल्ली के व्यक्ति को कर दी

गाजियाबाद में गजब सीन पैसा पटना के बृजमोहन ने दिया, रजिस्ट्री दिल्ली के व्यक्ति को कर दी
अखंड प्रताप सिंह, गाजियाबाद: नाम की क्या अहमियत होती है, जानना हो तो बृजमोहन की यह खबर पढ़ें। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने प्लॉट की स्कीम निकाली थी तो पटना और दिल्ली के बृजमोहन ने आवेदन किया था। प्लॉट पटना के बृजमोहन को मिला। उन्होंने इसके रुपये भी जमा करा दिए। रजिस्ट्री की बारी आई तो GDA ने दिल्ली के बृजमोहन के नाम पर रजिस्ट्री कर दी। दिल्ली के बृजमोहन की मौत हो गई तो कुछ दिनों तक फाइल दबी रही, उनका बेटा अब प्लॉट का म्यूटेशन कराने पहुंचा तो फिर से यह मामला खुल गया। जीडीए की एक्सपर्ट कमिटी अब इस मामले का निस्तारण करेगी। जीडीए के अपर सचिव सीपी त्रिपाठी ने बताया कि जीडीए के स्तर पर इस प्लॉट का म्यूटेशन होना संभव नहीं है। आवंटन किसी और को हुआ, पैसा उसने जमा किया, लेकिन रजिस्ट्री उसी नाम के दूसरे व्यक्ति को हो गई है।

नब्बे दशक में जीडीए ने वैशाली योजना में भूखंड का आवंटन किया था। इसमें पटना के रहने वाले बृजमोहन और दिल्ली के रहने वाले बृजमोहन ने आवेदन किया था। जब आवंटन की बारी आई तो तत्कालीन जीडीए वीसी ने स्टाफ से बृजमोहन की फाइल मंगाई तो अफरातफरी में पटना के बृजमोहन के बजाय जीडीए के स्टाफ ने दिल्ली के बृजमोहन की फाइल को दे दिया। जीडीए वीसी भूखंड को आवंटित कर दिया, जबकि भूखंड पटना के बृजमोहन को आवंटित किया जाना था। पटना के बृजमोहन जीडीए में लगातार किस्त जमा कराते रहे। जब किस्त पूरी जमा हो गई तो जीडीए के स्टाफ से दिल्ली के बृजमोहन को रजिस्ट्री कराने का लेटर भेज दिया।

गलत व्यक्ति ने करा ली रजिस्ट्री

दिल्ली के बृजमोहन जीडीए में आकर चुपचाप रजिस्ट्री करा ली। जब इस बात की जानकारी पटना के बृजमोहन को हुई तो उन्होंने इसकी शिकायत की। मामले पर जांच कमिटी बनी। पटना के बृजमोहन द्वारा जमा कराए गए पैसे को पटना के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से वेरीफाई भी कराया गया। मामला लेट हो रहा था तो पटना के बृजमोहन ने जमा करवाए गए पैसे का रिफंड ले लिया। जांच कमिटी ने यह फैसला किया कि बिना पैसा जमा कराए जिस व्यक्ति ने रजिस्ट्री कराई उसके खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की जाए, लेकिन फाइल दब गई। रजिस्ट्री भी जस की तस पड़ी रही। पिछले दिनों जीडीए में जब पिता की मौत के बाद बेटे ने इस भूखंड के म्यूटेशन के लिए आवेदन किया तो मामला खुला।

ब्याज के साथ पैसा जमा कराने का उठा मामला

बीच में यह मामला उठा कि जिस व्यक्ति को भूखंड का आवंटन गलत तरीके से हो गया है, उससे ब्याज के साथ पैसा जमा करा लिया जाए। जीडीए के कुछ जानकार अधिकारियों ने इस पर आपत्ति की। कहा कि ऐसा किया जाना नियम के खिलाफ होगा। इसलिए ब्याज के साथ पैसा जमा कराकर म्यूटेशन किया जाना संभव नहीं हो सकेगा। फिलहालमामला लटका हुआ है।

आरोपी को छोड़ निर्दोष पर कर दी थी कार्रवाई

कुछ दिन पहले जीडीए में फूलचंद नाम के दो स्टाफ के होने के चलते भी गड़बड़ी हुई थी। उसमें आरोपी फूलचंद को छोड़कर निर्दोष फूलचंद के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई थी। जब मामला जीडीए वीसी तक पहुंचा तो उन्होंने इस प्रकरण में निर्दोष को बरी करते हुए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का निर्देश दिया था। यह मामला भी जीडीए में काफी चर्चा का विषय बना हुआ था।
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