सिर पर चढ़ा कर्ज का बोझ
वारिकू के अनुसार, यह युवा डॉक्टर फिलहाल एक अस्पताल में नाइट शिफ्ट करता है, जहां उसे 23000 रुपये प्रति माह मिलते हैं। लेकिन यह रकम परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी नहीं थी।इस युवा के पिता को दो बार दिल का दौरा पड़ चुका है, जिसके इलाज के खर्च के लिए परिवार को भारी कर्ज लेना पड़ा। वहीं, उसके बड़े भाई की नौकरी भी अस्थिर है, जिससे घर का पूरा वित्तीय दबाव इस युवा डॉक्टर पर आ गया। वारिकू ने बताया कि डॉक्टर इस बात को लेकर भी खुद को दोषी महसूस करता है कि वह 26 साल का हो गया है और अब भी अपने परिवार की स्थिति सुधारने में बड़ा योगदान नहीं दे पा रहा है।
कमाई बढ़ाने के लिए 19 घंटे काम
अपने परिवार की मदद और कर्ज चुकाने के लिए इस एमबीबीएस ग्रेजुएट ने दिन में एक और नौकरी शुरू कर दी, जहां से उसे 24000 रुपये प्रति माह की अतिरिक्त कमाई होती है। दो नौकरियों के इस चक्र के कारण वह अब हर दिन लगभग 19 घंटे काम करता है। इतनी थका देने वाली दिनचर्या के बावजूद, उसका सपना मेडिकल में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हासिल करने का है, लेकिन मौजूदा आर्थिक हालातों ने फिलहाल उसके इस सपने को बहुत दूर धकेल दिया है।परिवार का पहला डॉक्टर
अंकुर वारिकू ने उस युवा से पूछा, 'डॉक्टर का जीवन बहुत कठिन होता है, खासकर भारत में। आप 30 साल की उम्र तक पढ़ाई करते हैं और जीवन भर मेहनत करते हैं, ताकि आप अपना गुजारा कर सकें। क्या आपको यह सब तब पता था जब आप डॉक्टर बनना चाहते थे?'युवा डॉक्टर का जवाब बेहद भावुक करने वाला था। उसने वारिकू से कहा कि उसे यह सब पता था। लेकिन वह हमेशा से डॉक्टर बनना चाहता था। उस युवा ने बताया कि वह अपने परिवार का पहला डॉक्टर है और इस बात से उसके माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। हालांकि, उसने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए बस इतना कहा, 'मैं बस यही दुआ करता हूं कि काश हमारी आर्थिक स्थिति थोड़ी बेहतर होती।'दिल तोड़ने वाली स्थिति
इस कहानी को शेयर करते हुए अंकुर वारिकू ने इस स्थिति को 'दिल तोड़ने वाला' बताया। इसके साथ ही उन्होंने डॉक्टर के अटूट हौसले और सकारात्मक दृष्टिकोण की जमकर तारीफ की। वारिकू ने कहा कि परिस्थितियां भले ही कितनी भी कठिन क्यों न हों, इस युवा का जज्बा यह साफ बताता है कि उसकी सफलता अब बस कुछ ही समय की बात है।उन्होंने आगे लिखा कि भारत में चिकित्सा आज भी सबसे कठिन पेशों में से एक है। न केवल इसलिए कि इसमें प्रवेश पाना मुश्किल है, बल्कि इसलिए भी कि डिग्री मिलने के बाद भी खुद को और परिवार को आर्थिक रूप से संभालने के लिए कई डॉक्टरों को कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।











