बिकने को तैयार 87 साल पुराना हल्दीराम, सिंगापुर, दुबई और अमेरिका की दिग्गज कंपनियों में मची है खरीदने की होड़

बिकने को तैयार 87 साल पुराना हल्दीराम, सिंगापुर, दुबई और अमेरिका की दिग्गज कंपनियों में मची है खरीदने की होड़
नई दिल्ली: भारत में नमकीन और मिठाई इंडस्ट्री पर कई दशक से राज कर रहे लोकप्रिय ब्रांड हल्दीराम (Haldiram) में हिस्सेदारी खरीदने की होड़ दिलचस्प हो गई है। दुनिया की सबसे बड़ी प्राइवेट इक्विटी कंपनी ब्लैकस्टोन इंक (Blackstone Inc) की अगुवाई वाले कंसोर्टियम को टक्कर देने के लिए अब टेमासेक होल्डिंग्स लिमिटेड (Temasek Holdings Ltd) और बेन कैपिटल (Bain Capital) ने हाथ मिला लिया है। इसे देश में अब तक का सबसे बड़ा प्राइवेट इक्विटी एक्विजिशन माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक बेन और टेमासेक ने पिछले हफ्ते पिछले हफ्ते नॉन-बाइंडिंग ऑफर सौंप दिया है। इसके लिए हल्दीराम की वैल्यूएशन 8 से 8.5 अरब डॉलर यानी 66,400 से 70,500 करोड़ रुपये आंकी गई है। बेन और टेमासेक ने हल्दीराम में स्टेक खरीदने के लिए फाउंडर फैमिली के साथ पहले अलग-अलग बातचीत की थी। लेकिन अब ब्लैकस्टोन की अगुवाई वाले कंसोर्टियम को टक्कर देने के लिए दोनों ने आपस में हाथ मिला लिया है।

ईटी ने 14 मई को सबसे पहले खबर दी थी कि दुनिया के सबसे बड़े निजी इक्विटी फंड ब्लैकस्टोन ने कंपनी में 76% तक हिस्सेदारी खरीदने के लिए अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) और सिंगापुर के सॉवरेन वेल्थ फंड जीआईसी के साथ हाथ मिलाया है। बेन के ग्लोबल फंड्स में टेमासेक लिमिटेड पार्टनर है। ADIA और GIC के साथ भी बेन का यही रिश्ता है। पिछले साल नवंबर में, बेन ने अपने पांचवें पैनएशिया प्राइवेट इक्विटी फंड का अंतिम समापन 7.1 अरब डॉलर पर पूरा किया, जो अपने लक्ष्य से 40% अधिक था। यह इस क्षेत्र के लिए उसका सबसे बड़ा फंड था। बेन पिछले सात महीनों में हल्दीराम को ऑपरेट करने वाले अग्रवाल परिवार के बातचीत में लगा था। उसकी अग्रवाल परिवार के नागपुर और दिल्ली गुट के साथ बात हो रही थी। अग्रवाल परिवार पूरे देश में रिस्ट्रक्चरिंग में लगा है।

क्या है सबसे बड़ी चुनौती

2023 के आखिर में बेन के अधिकारियों ने हल्दीराम की फैक्ट्री का भी दौरा किया था। तब दोनों पक्षों के बीच बातचीत में तेजी आई थी। यह बातचीत माइनोरिटी इन्वेस्टमेंट पर केंद्रित थीं। लेकिन अग्रवाल परिवार की योजना अब स्नैक्स बिजनस का मर्जर करने और रेस्तरां चेन के लिए अलग कंपनी बनाने की है। यह कंपनी परिवार के पास ही रहेगी। इसके साथ ही परिवार हल्दीराम में मैज्योरिटी स्टेक बेचने को तैयार है। अग्रवाल परिवार की अगली पीढ़ी दूसरे बिजनस को आगे बढ़ाना चाहती है। हल्दीराम में मैज्योरिटी हिस्सेदारी बेचने की डील तीन-चार महीने में पूरी हो सकती है। हल्दीराम के स्नैक्स बिजनस के मर्जर को एनसीएलटी ने मंजूरी दे दी है और इसमें भी तीन-चार महीने लगने की उम्मीद है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने पिछले अप्रैल में विलय योजना को मंजूरी दी थी।

सूत्रों के मुताबिक बेन अन्य एलपी और भागीदारों को भी इस डील में शामिल करके बड़ा कंसोर्टियम बना सकता है। लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अग्रवाल परिवार हल्दीराम में कितनी हिस्सेदारी बेचता है और इसकी वैल्यूएशन कितनी रहती है। इसी आधार पर ब्लैकस्टोन भी अपने कंसोर्टियम का दायरा बढ़ा सकता है। लेकिन इतना तय है कि दोनों कंसोर्टियम मैनेजमेंट कंट्रोल में बदलाव चाहता है। यह पहला मौका है जब बेन और टेमासेक भारत में किसी डील के लिए साथ आए हैं। इससे पहले बेन ने को-इन्वेस्टमेंट के लिए जीआईसी के साथ मिलकर काम किया है। बेन और टेमासेक ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हल्दीराम के सीईओ केके चुटानी ने कहा कि कंपनी इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती है। सूत्रों का कहना है कि नॉन-बाइंडिंग ऑफर का मतलब यह नहीं है कि अंतिम वार्ता सफल होगी। एक पीई अधिकारी ने कहा कि इस डील में सबसे बड़ी समस्या इसका आकार और अग्रवाल परिवार द्वारा अपेक्षित प्रीमियम है।
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