पाकिस्तान की इस घोषणा के बाद बिना दस्तावेजों के रह रहे लोगों में भय व्याप्त हो गया और फैसले की कई अधिकार समूहों ने निंदा की थी। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अफगान नागरिकों को जबरन वापस भेजना उनको खतरे में डालना होगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने शुक्रवार को कहा कि नयी नीति केवल अफगान नागरिकों को लक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि हम पिछले चार दशकों से अफगान शरणार्थियों की उदारता से मेजबानी कर रहे हैं।
बलोच ने कहा कि 1979-1989 की अवधि में सोवियत कब्जे के दौरान इनमें से लाखों लोग अफगानिस्तान छोड़कर चले आए थे। उन्होंने कहा कि उन 14 लाख अफगान नागरिकों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, जो पाकिस्तान में शरणार्थी के रूप में पंजीकृत हैं। प्रवक्ता ने कहा, ''हमारी नीति केवल उन व्यक्तियों के लिए है, जो अवैध रूप से यहां रह रहे हैं, चाहे उनकी राष्ट्रीयता कुछ भी हो। लेकिन, दुर्भाग्य से एक गलतफहमी या गलत बयानी हुई है और किसी कारण से लोगों ने इसे अफगान शरणार्थियों के साथ जोड़ना शुरू कर दिया है।
