38 हजार के फ्लैट देने का था दावा
23 जुलाई 2019 को आम्रपाली के प्रॉजेक्टों को पूरा कराने के लिए कोर्ट रिसीवर को जिम्मेदारी दी गई थी। कोर्ट रिसीवर की निगरानी में एनबीसीसी को 38 हजार फ्लैट तैयार कर 3 साल में देने थे। अब तक साढ़े चार साल गुजर चुके हैं। जिसमें केवल 15 हजार फ्लैट ही दिए जा सके हैं। वहीं हैंडओवर की बात करें तो केवल 5 हजार फ्लैट 31 दिसंबर तक हैंडओवर हुए हैं। बाकी 10 हजार फ्लैट बनने के बाद ही यूं ही पड़े हैं।
- कुछ फ्लैट में फॉरेसिंक ऑडिट के डेटा में किसी और का नाम है और क्लेम दूसरा कर रहा।
- बिल्डर ने अधूरे दस्तावेज दे दिए। अब कोर्ट रिसीवर के सामने लोग पूरे कागज नहीं दिखा पा रहे।
- हैंडओवर के वक्त कई तरह के चार्ज लगाए जा रहे, जिसपर आए दिन झड़प होती है।
- कोर्ट रिसीवर ऑफिस में एनओसी की फाइल कई काउंटर से गुजरती है। किसी की निर्धारित डेडलाइन भी नहीं है।
ये हैं फ्लैट हैंडओवर न होने के कारण
- कुछ फ्लैट में फॉरेसिंक ऑडिट के डेटा में किसी और का नाम है और क्लेम दूसरा कर रहा।
- बिल्डर ने अधूरे दस्तावेज दे दिए। अब कोर्ट रिसीवर के सामने लोग पूरे कागज नहीं दिखा पा रहे।
- हैंडओवर के वक्त कई तरह के चार्ज लगाए जा रहे, जिसपर आए दिन झड़प होती है।
- कोर्ट रिसीवर ऑफिस में एनओसी की फाइल कई काउंटर से गुजरती है। किसी की निर्धारित डेडलाइन भी नहीं है।
फिर से आंदोलन करने की तैयारी में बायर्स
बायर्स की असोसिएशन नेफोवा के पदाधिकारी दीपांकर जैन ने बताया कि हम लोग 4500 बायर्स के साथ फिर से कोर्ट में रिट डालने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही सड़कों पर फिर से उतने का समय आ गया है। बायर्स में इतना ज्यादा रोष है। सबसे ज्यादा परेशानी कोर्ट रिसीवर के कार्यालय में बैठे स्टाफ से लोगों को हो रही है। स्टाफ का आपस में कोऑर्डिनेशन नहीं है, जिसका खामियाजा बायर्स को भुगतना पड़ रहा है। बायर्स इंद्र गुप्ता का कहना है कि तमाम बायर दो-दो साल से कागज लिए घूम रहे हैं। तैयार होने के बाद भी न उन्हें फ्लैट दे रहे हैं न उनके मामले निस्तारित करने का डिसीजन ले रहे हैं।











