1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना का साथ देने वाले पदमसिंह सोढ़ा (77) बाड़मेर के छाछरो गांव के सरपंच चुने गए हैं। 24 अक्टूबर को हुए सरपंच चुनाव में पदम सिंह 338 वोट से चुनाव जीत गए। उन्हें 950 वोट मिले, जबकि नजदीकी प्रतिद्वंदी धना राम को 612 वोट मिले।
1971 के युद्ध में भारतीय सेना की मदद करने के आरोप में पाकिस्तान ने पदमसिंह और उनके भाई लक्ष्मणसिंह पर जासूसी के आरोप लगाए थे। दोनों पर 2-2 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।
दरअसल युद्ध के दौरान पदमसिंह ने पाकिस्तान स्थित छाछरो गांव में अपनी पुश्तैनी हवेली पर तिरंगा फहराया था। इसके बाद पदमसिंह सोढ़ा पाकिस्तान में अपनी हवेली और पुश्तैनी जमीन छोड़कर परिवार के साथ भारत आ गए थे।
करीब डेढ़ साल पहले राजस्थान में नया राजस्व गांव छाछरो (बावड़ी कलां) बना और अब पदमसिंह उसी गांव के सरपंच बन गए हैं। यह नाम इस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत और 1971 के भारत-पाक युद्ध से जुड़े के इतिहास को सम्मान देने के लिए रखा गया है।
आठ महीने तक भारतीय सेना के नियंत्रण में रहा छाछरो
6 दिसंबर 1971 को ब्रिगेडियर भवानी सिंह के साथ पाकिस्तान की ओर गए सिविल दस्ते में पदमसिंह भी शामिल थे। वे पाकिस्तान के छाछरो के ठाकुर थे। उनके बड़े भाई लक्ष्मण सिंह सोढ़ा पाकिस्तान के पूर्व रेलमंत्री रहे थे।
युद्ध के दौरान पदमसिंह और उनके परिवार ने भारतीय सेना का साथ दिया था। पदमसिंह ने अपनी हवेली पर भारतीय तिरंगा फहराया था।
युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने पश्चिमी सीमा के बाखासर क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए सात दिन के भीतर पाकिस्तान के करीब 100 किलोमीटर अंदर स्थित छाछरो पर कब्जा कर लिया था। पाकिस्तान का यह बड़ा कस्बा करीब आठ महीने तक भारतीय सेना के नियंत्रण में रहा।
बावड़ी कलां में बसाया नया ठिकाना
पदमसिंह करीब 55 साल पहले पाकिस्तान छोड़कर परिवार के साथ भारत आ गए थे। वे पहले चौहटन पहुंचे और फिर बावड़ी कलां में बस गए। उनके भाई लक्ष्मणसिंह चौहटन के प्रधान भी रहे। पाकिस्तान में छूटे अपने गांव छाछरो की यादें उन्होंने हमेशा संजोकर रखीं। वे खुद को पदमसिंह छाछरो कहते थे, लेकिन जिस गांव का नाम उनकी पहचान बन गया था, वह भारत में उनका गांव नहीं था।
करीब डेढ़ साल पहले राजस्थान में गांवों के परिसीमन और नए राजस्व गांव बनाने की प्रक्रिया के दौरान बावड़ी कलां से अलग छाछरो गांव बनाया गया। अब इसी गांव में पदमसिंह सरपंच निर्वाचित हुए हैं।
भारत और पाकिस्तान के छाछरो गांवों के बीच करीब एक किलोमीटर की दूरी बताई जाती है।

