ग्वालियर के मोहनपुर गांव से रहस्यमय ढंग से लापता हुआ 4 साल का ‘रितेश पाल’ पुलिस के लिए एक साल बाद भी ‘मिस्ट्री’ बना हुआ है। 1 नवंबर 2026 को मासूम के अपहरण को एक साल पूरा हो गया है। इस एक साल में ऐसी कौनसी जगह है जहां पुलिस या परिजन ने उसे तलाश नहीं किया।
दैनिक भास्कर ने जब उस मां सपना पाल से बात की जिसका बेटा एक साल से लापता है तो उसने कहा कि अब तो उम्मीद भी टूट गई है कि मेरा ‘रितेश’ कभी मेरे पास आकर मां कहकर मुझे पुकारेगा और मेरी गोद में खेलेगा।
सपना का कहना है कि बीते एक साल में मैंने 100 साल का दर्द झेला है। यह एक मां का कलेजा ही जानता है कि जिसका गोद में खेलता बेटा आंखों के सामने से चला गया हो और पुलिस उस पर ही शक करे तो उस पर क्या बीतती होगी।
बेबस मां का दर्द- कम होती जा रही उम्मीद
मासूम की मां सपना ने दर्द जताते हुए कहा कि हर गुजरते दिन के साथ बेटे के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी बड़े परिवार या व्यापारी का बच्चा होता तो पुलिस तुरंत तलाश कर लेती, लेकिन गरीब होने के कारण उनके मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।
उन्होंने कहा कि परिवार का शायद ही कोई सदस्य बचा हो, जिस पर शक न करते हुए पुलिस ने पूछताछ न की हो। पहले ने पहले ही दिन से मान लिया है कि बच्चा को हमने कहीं छुपा दिया है। बस यही कारण है कि बच्चा आज तक नहीं मिला है।
घर के सामने खेलते हुए हुआ था लापता
मुरार क्षेत्र के मोहनपुर स्थित काली माता मंदिर के पास झोपड़ी में रहने वाली सपना पाल का तीन वर्षीय बेटा ‘रितेश’ 1 नवंबर 2025 की दोपहर करीब 12:30 बजे घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था।
करीब 1 बजे जब मां सपना उसे दूध पिलाने पहुंचीं तो वह वहां नहीं मिला। परिजन ने आसपास काफी तलाश किया, लेकिन पता नहीं चला। इसके बाद देर शाम को मुरार थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई।
जिसके बाद पुलिस ने तलाश शुरू की, लेकिन आज पूरा एक साल बीतने के बाद भी पुलिस की तलाश खत्म नहीं हुई है।
जंगल तक खंगाल डाला, फिर भी नहीं मिला सुराग
जिस स्थान से बच्चा गायब हुआ, उसके आसपास घना जंगल है। शुरुआती आशंका थी कि बच्चा खेलते-खेलते जंगल में चला गया होगा।
इसी कारण पुलिस ने 10 से ज्यादा टीम, 100 से ज्यादा जवान और ड्रोन कैमरों की मदद से जंगल का कोना-कोना खंगाला। जमीन से लेकर हवाई निगरानी तक की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
पुलिस ने कई एंगल पर की जांच
जांच में सामने आया कि रितेश की मां सपना और पिता दलबीर सिंह के बीच मनमुटाव चल रहा था। दोनों करीब आठ महीने से अलग रह रहे थे। उनके दो बेटे हैं।
बड़ा बेटा पिता के साथ और छोटा बेटा ‘रितेश’ मां के साथ रह रहा था। सपना मायके में रह रही थीं। पुलिस ने मां, मामा, मामी, पिता, ताऊ और बाबा सहित कई लोगों से पूछताछ की, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।
धार्मिक एंगल पर मन टटोला
पुलिस ने दोनों परिवारों को गिरगांव महादेव (मजिस्ट्रेट महादेव) में शपथ लेने की सलाह दी गई। 2 दिसंबर 2025 को दोनों पक्ष वहां पहुंचे और बच्चे के बारे में जानकारी न होने की कसम खाई, लेकिन इससे भी कोई नई जानकारी सामने नहीं आई। यहां भी पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला न ही दोनों पक्षों में से कोई टूटा।
लव ट्रायंगल को भी खंगाला
पति-पत्नी के अलग रहने के कारण पुलिस ने तीसरे व्यक्ति की भूमिका की संभावना पर भी जांच की। दोनों परिवारों से जुड़े करीबियों से पूछताछ की गई, लेकिन यह दिशा भी बेनतीजा रही।
पिता हाईकोर्ट पहुंचे, याचिका खारिज
गिरगांव महादेव की अदालत में फैसला न होने के बाद ‘रितेश’ के पिता दलबीर ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दावा किया था कि बच्चा मां के पास है। कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि मां को बच्चे पर वैधानिक अधिकार है।
पुलिस बोली- मामला पारिवारिक लग रहा है
रितेश के बारे में पूछा तो पुलिस का कहना है कि कई एंगल पर जांच की है। मामला पूरा पारिवारिक लग रहा है। ग्वालियर पुलिस का रिकॉर्ड लापता व अपह्रत बच्चों को तलाशने में शत प्रतिशत है। पर यह बच्चा पारिवारिक क्लेश में कहीं गुम हुआ है। जिस कारण अभी तक नहीं मिल पाया है।
प्रभारी एसपी जयराज कुबेर बोले- अभी तलाश जारी
प्रभारी एसपी जयराज कुबेर ने बताया कि हमारी तलाश अभी भी जारी है। कोई नया इनपुट नहीं है, लेकिन पुराने इनपुट पर छानबीन जारी है। पुलिस की एक टीम लगातार इस केस से जुड़े लोगों पर निगरानी रखे हुए है।

