दरअसल, 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप में छह गेंदों में लगातार छह छक्के लगाने वाले युवराज सिंह अगले ही साल शुरू हुई इंडियन प्रीमियर लीग में फ्रैंचाइजी किंग्स इलेवन पंजाब के कप्तान बनाए जाते हैं। बाएं हाथ के इस धाकड़ ऑलराउंडर ने 2008 से 2010 तक अपनी घरेलू टीम किंग्स इलेवन पंजाब की कप्तानी की थी। बाद में कुछ ऐसा हुआ कि वह टीम छोड़ने को मजबूर हो गए और फिर अगले कई सीजन में सहारा पुणे वॉरियर्स, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, दिल्ली डेयरडेविल्स, सनराइजर्स हैदराबाद और मुंबई इंडियंस जैसी टीमों का हिस्सा रहे, लेकिन दोबारा पंजाब से नहीं खेला।
दरअसल, एक इंटरव्यू में युवराज सिंह ने किंग्स इलेवन पंजाब टीम के माहौल को खराब और टीम मैनेजमेंट को अनप्रोफेशनल बताया था। युवी ने कहा था कि बेकार मैनेजमेंट के चलते वह टीम छोड़कर भाग जाना चाहते थे। युवराज ने अपने कड़वे अनुभव को शेयर करते हुए कहा, 'मेरी बात नहीं मानी जाती थी। मैं जैसा कहता था, वे वैसा कुछ नहीं करते थे। और जब मैंने टीम का साथ छोड़ा तो उन्होंने उन सभी खिलाड़ियों को खरीद लिया जिनके लिए मैं उनसे कहता था। मुझे बस पंजाब की टीम की जर्सी के अलावा और किसी चीज से प्यार नहीं था।'
नेस वाडिया और प्रीति जिंटा की मालिकाना हक वाली किंग्स इलेवन पंजाब का नाम अब बदलकर पंजाब किंग्स कर दिया गया है। आईपीएल शुरू होने के 15 साल बाद भी टीम अपने पहले खिताब की तलाश में है। युवराज के आईपीएल करियर की बात करें तो उन्होंने 132 मैच में बल्ले से 2750 रन बनाए हैं, जिसमें 13 अर्धशतक शामिल हैं जबकि गेंदबाजी में दो बार हैट्रिक भी हासिल की है।
नेस वाडिया और प्रीति जिंटा की मालिकाना हक वाली किंग्स इलेवन पंजाब का नाम अब बदलकर पंजाब किंग्स कर दिया गया है। आईपीएल शुरू होने के 15 साल बाद भी टीम अपने पहले खिताब की तलाश में है। युवराज के आईपीएल करियर की बात करें तो उन्होंने 132 मैच में बल्ले से 2750 रन बनाए हैं, जिसमें 13 अर्धशतक शामिल हैं जबकि गेंदबाजी में दो बार हैट्रिक भी हासिल की है।











