अमेरिका ने 40 साल पहले बनाया था प्लान
मैल्कम नैंस ने कहा कि यह काम कम से कम दो हफ्तों में पूरा हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी समस्या भी बताई। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट के अमेरिकी कमांडरों ने 40 साल पहले ही इस योजना का विश्लेषण किया था। मैल्कम ने बताया कि उस समय अनुमान लगाया गया था कि हमें 6000 मरीन सैनिकों के साथ-साथ कई द्वीपों पर तैनात सभी उपकरणों की आवश्यकता होगी।मैल्कम ने बताया कि योजना यह थी कि पहले लारक, होर्मुज और केशम द्वीप पर कब्जा करके बंदर अब्बास को घेर लिया जाए। फिर प्रतिबंधित समुद्री सीमा को तोड़कर आगे बढ़ा जाए। इसके बाद प्रतिबंधित समुद्री सीमा को तोड़कर आगे बढ़ा जाए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अमेरिका ने 1988 में भी इस तरह का प्लान नहीं बनाया था, जब ईरानी बारूदी सुरंगों ने अमेरिकी जहाजों को डुबोने की कोशिश की थी। उन्होंने इसकी वजह भी बताई।
अमेरिका के लिए खतरनाक है होर्मुज स्ट्रेट
- मैल्कम ने बताया कि इसके लिए अमेरिका ईरान को होर्मुज स्ट्रेट में हमला करना होगा। इसके जवाब में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड और बासिज फोर्स के सैनिक पहाड़ों से इन द्वीपों पर बमबारी और आत्मघात हमला करेंगे।
- उन्होंने रसद सप्लाई से जुड़ी समस्या पर ध्यान दिलाया। मैल्कम ने कहा कि यह सप्लाई UAE और कतर के ठिकानों से होगी, जिन पर फिर से हमला होगा। वे शायद इसके लिए सहमत न हों।
- इसका मतलब होगा कि सप्लाई को एक बेहद विवादित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना होगा। उन्होंने इसे पागलपन बताया।
- मिडिल ईस्ट में तैनात सेना को ईरानी पहाड़ों के सामने मिसाइलों, पनडुब्बी ड्रोन, सुसाइड बोट या बारूदी सुरंगों के बीच लॉन्च करना होगा, जिनका अमेरिका ने पता नहीं लगाया है।











