इस साल आईएमएफ और विश्व बैंक की सालाना बैठकें ऐसे समय में हुईं जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच चल रहे व्यापार युद्ध में एक नया मोड़ आया। इसने दुनिया भर के हजारों वित्त अधिकारियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के बीच चर्चाओं पर अपना दबदबा बनाया। अमेरिका और चीन के बीच अगर ट्रेड टेंशन बढ़ती है तो भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। उस पर भी कई तरह से असर पड़ेगा।
आईएमएफ ने मंगलवार को 2025 के लिए ग्लोबल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 3.2% लगाया था। यह जुलाई के 3.0% और अप्रैल के 2.8% के अनुमान से ज्यादा है। आईएमएफ ने कहा कि टैरिफ के झटके और वित्तीय स्थितियां उम्मीद से कहीं अधिक अनुकूल साबित हुई हैं। हालांकि, यह अनुमान अमेरिका और चीन की ओर से हाल ही में उठाए गए नए खतरों को नहीं दर्शाता है।
सिर पर अभी भी मंडरा रहा है खतरा
जॉर्जीवा ने कहा कि आईएमएफ इन विकासों पर बारीकी से नजर रखेगा। लेकिन, उन्होंने यह भी नोट किया कि सदस्य देश आम तौर पर राहत महसूस कर रहे हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था छह महीने पहले की आशंकाओं से कहीं अधिक लचीली साबित हुई है। उन्होंने कहा कि देश अपनी आस्तीनें ऊपर उठाने के लिए तैयार हैं ताकि बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके, नियामक सुधार किए जा सकें और वैश्विक असंतुलन को दूर किया जा सके। हालांकि, वे अभी भी गहराई से चिंतित हैं।जॉर्जीवा ने कहा, 'अभी भी चिंता की भावना है। कारण है कि विश्व अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन हमारी जरूरत से कम है। अनिश्चितता का बहुत गहरा बादल अभी भी हमारे सिर पर मंडरा रहा है।'











