सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अल कायदा से जुड़े जमात नुसरत अल-इस्लाम अल-मुस्लिमीन (जेएनआईएम) के लड़ाकें बमाकों को घेर रहे हैं। उन्होंने राजधानी आने वाली सड़कें बंद कर दी हैं। वह सैन्य गश्ती दलों और टैंकर ट्रकों पर घात लगा रहे हैं। इससे बमाको में आम जिंदगी पटरी से उतर रही है। खासतौर से तेल की कमी बड़ी परेशानी का सबब बन रही है।
वाहनों को नहीं मिल रहा तेल
बमाको में पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल पंपों पर मोटरसाइकिलों और दूसरे वाहनों की लंबी कतारें दिखाई देखी गई हैं। ईंधन की कमी के कारण स्कूल और कॉलेज बंद हैं। इसकी वजह पिछले दो महीनों से जेएनआईएम लड़ाकों के ईंधन आपूर्ति पर किए गए हमले हैं। खासतौर से आइवरी कोस्ट और सेनेगल से आने वाले टैंकरों को लड़ाकों ने निशाना बनाया हैविश्लेषक डेनियल गारोफालो ने सीएनएन से बातचीत में कहा कि जेएनआईएम ने नाकाबंदी के जरिए आर्थिक युद्ध अभियान तेज किया है। इसके जवाब में सरकारी बलों ने गश्त बढ़ा दी है और लड़ाकू हेलीकॉप्टरों से हमले किए हैं। सेना के हमले लगातार जारी हैं लेकिन मध्य और दक्षिणी माली के बड़े हिस्से में ईंधन की कमी के चलते सरकारी बलों की टुकड़ियां अलग-थलग पड़ रही हैं।
जेएनआईएम ने कैसे बढ़ाई ताकत
जेएनआईएम कई वर्षों से माली में सक्रिय है। इसका गठन 2017 में जिहादी गुटों के एक गठबंधन के रूप में हुआ था। इस गुट ने अल कायदा के प्रति अपनी निष्ठा घोषित की है। हाल के वर्षों में इसकी ताकत बढ़ी है, जिससे मध्य और पश्चिमी माली के अधिकांश हिस्सों में अस्थिरता आई है। इस गुट ने कारखानों, औद्योगिक सुविधाओं, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और कारीगर सोने के खनन स्थलों पर हमला किया है।
आगे क्या हो सकता है?
रिपोर्ट कहती है कि उग्रवादियों का बमाको पर सीधा हमला करने की कोई तैयारी का कोई संकेत नहीं है। उनकी रणनीति राजधानी को घेरने और सैन्य जुंटा के खिलाफ अशांति भड़काने की प्रतीत होती है। जेएनआईएम के उग्रवादी स्थानीय समुदायों में घुल-मिल जाते हैं और अपने परिवेश को अच्छी तरह समझते हैं।एक्सपर्ट का कहना है कि जेएनआईएम आबादी के गरीब तबके और जातीय अल्पसंख्यकों के असंतोष और मांगों को व्यक्त करने में बहुत कुशल हो गया है। जेएनआईएम आखिरकार बमाको में अपनी पसंद की सरकार पर जोर देगा, भले ही वे खुद नियंत्रण ना लें। वह अपने मिजाज की सरकार को ला सकता है।











