T-4 एयरबेस पर पिछले दिनों हमला करने की कोशिश हुई थी, लिहाजा तुर्की यहां सुरक्षा को बढ़ाना चाहता है। ये एयरबेस तुर्की की सीमा से करीब 140 मील दक्षिण में और तुर्की और इजराइल के बीच में है। सीरिया के हवाई क्षेत्र को यहां से काफी आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। मिडिल ईस्ट आई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि तुर्की यहां हिसार सिस्टम के साथ साथ एस-400 की तैनाती कर सकता है। एस-400 रूस में बना एयर डिफेंस सिस्टम है, जो 250 मील तक लक्ष्यों को भेदने की क्षमता रखता है।
एस-400 को माना जाता है गेम चेंजर डिफेंस सिस्टम
S-400 डिफेंस सिस्टम को असली गेम-चेंजर माना जाता है। 2019 में तुर्की ने रूस से 2.5 बिलियन डॉलर के सौदे में इसे खरीदा था। यह प्रणाली 98,000 फीट की ऊंचाई पर स्टील्थ एयरक्राफ्ट से लेकर बैलिस्टिक मिसाइलों तक के लक्ष्यों का पता लगा सकती है और उन्हें नष्ट कर सकती है। इसका रडार 370 मील दूर मौजूद किसी हथियार को ट्रैक सकता है। इसके अलावा इसकी मिसाइलें 250 मील की दूरी पर हमला कर सकती हैं। माना जाता है कि T-4 एयरबेस में अगर एस-400 मिसाइल सिस्टम की तैनाती होती है तो इसकी जद में करीब करीब पूरा सीरिया आ जाएगा। इसके अलावा ये डिफेंस सिस्टम इजराइल, पूर्वी तुर्की और भूमध्य सागर के कुछ हिस्सों को भी कवर कर सकता है
S-400 डिफेंस सिस्टम को असली गेम-चेंजर माना जाता है। 2019 में तुर्की ने रूस से 2.5 बिलियन डॉलर के सौदे में इसे खरीदा था। यह प्रणाली 98,000 फीट की ऊंचाई पर स्टील्थ एयरक्राफ्ट से लेकर बैलिस्टिक मिसाइलों तक के लक्ष्यों का पता लगा सकती है और उन्हें नष्ट कर सकती है। इसका रडार 370 मील दूर मौजूद किसी हथियार को ट्रैक सकता है। इसके अलावा इसकी मिसाइलें 250 मील की दूरी पर हमला कर सकती हैं। माना जाता है कि T-4 एयरबेस में अगर एस-400 मिसाइल सिस्टम की तैनाती होती है तो इसकी जद में करीब करीब पूरा सीरिया आ जाएगा। इसके अलावा ये डिफेंस सिस्टम इजराइल, पूर्वी तुर्की और भूमध्य सागर के कुछ हिस्सों को भी कवर कर सकता है
इसीलिए अमेरिका को डर है कि सिस्टम का रडार F-35 की स्टील्थ क्षमताओं को स्कैन सकता है। ये एक पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसका रडार क्रॉस-सेक्शन गोल्फ की गेंद से भी छोटा है। ये सटीक-गाइडेड हथियारों के साथ 700 मील दूर लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम है। पेंटागन ने तर्क दिया है कि S-400 का रखरखाव करने वाले रूसी तकनीशियन F-35 का डेटा चुकाकर उसे मॉस्को भेज सकता है। तुर्की पहले भी एस-400 को नाटो नेटवर्क से अलग रखने से इनकार कर चुका है। और अब अगर सीरिया में एस-400 की तैनाती होती है, तो अमेरिका के लिए ये एक बहुत बड़ा झटका होगा। आपको बता दें कि अमेरिका, पूर्वी सीरिया में अपनी उपस्थिति बनाए हुए है, जहां लगभग 900 सैनिकों के साथ मिलकर वो ISIS का मुकाबला कर रहा है। इजराइल F-35 से ही सीरिया में हमले करता है, ऐसे में अमेरिका का डर बढ़ता जा रहा है। उन्हें डर है कि ऐसे ही किसी ऑपरेशन में अमेरिकी फाइटर जेट की टेक्नोलॉजी चोरी हो सकती है।











