आठवें वेतन आयोग की तैयारी है और इससे पहले 12 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर जीरो टैक्स की व्यवस्था की गई है। क्या इससे महंगाई को हवा मिलेगी?
पे कमिशन अगले साल पहली जनवरी से लागू होगा और फिर पैसा बाद में जाएगा। रही टैक्स रिलीफ, तो हम लोगों का ही पैसा उनकी जेब में रहने दे रहे हैं। हम भी उस पैसे को खर्च ही करते। लोग अपने विवेक से खर्च करेंगे और बचाएंगे भी। इससे ओवरऑल इकॉनमी को फायदा होगा। इससे इंफ्लेशन बढ़ने का रिस्क नहीं है।
पे कमिशन अगले साल पहली जनवरी से लागू होगा और फिर पैसा बाद में जाएगा। रही टैक्स रिलीफ, तो हम लोगों का ही पैसा उनकी जेब में रहने दे रहे हैं। हम भी उस पैसे को खर्च ही करते। लोग अपने विवेक से खर्च करेंगे और बचाएंगे भी। इससे ओवरऑल इकॉनमी को फायदा होगा। इससे इंफ्लेशन बढ़ने का रिस्क नहीं है।
बजट में सरकारी पूंजीगत खर्च 10% बढ़ा है, क्या इसे ज्यादा नहीं होना चाहिए था?
कैपेक्स 10% नहीं, बल्कि 17% बढ़ा है। केंद्र सरकार 4 लाख 27 हजार करोड़ रुपये राज्यों को ग्रांट में दे रही है कैपेक्स के लिए। हम सीधे तौर पर इसे खर्च नहीं करते। वे अपनी असेट्स पर, अपनी स्कीमों पर इसे खर्च करते हैं। इसे हम अपने खाते में नहीं दिखा सकते क्योंकि केंद्र की असेट्स पर यह खर्च नहीं होगा। इस तरह इसे मिलाकर कैपेक्स 15.48 लाख करोड़ रुपये का है, जो पहले करीब 13 लाख करोड़ था। इस तरह 17% की बढ़त है। इसलिए कैपेक्स को केवल 11.21 लाख करोड़ रुपये नहीं कहा जाना चाहिए।
कैपेक्स 10% नहीं, बल्कि 17% बढ़ा है। केंद्र सरकार 4 लाख 27 हजार करोड़ रुपये राज्यों को ग्रांट में दे रही है कैपेक्स के लिए। हम सीधे तौर पर इसे खर्च नहीं करते। वे अपनी असेट्स पर, अपनी स्कीमों पर इसे खर्च करते हैं। इसे हम अपने खाते में नहीं दिखा सकते क्योंकि केंद्र की असेट्स पर यह खर्च नहीं होगा। इस तरह इसे मिलाकर कैपेक्स 15.48 लाख करोड़ रुपये का है, जो पहले करीब 13 लाख करोड़ था। इस तरह 17% की बढ़त है। इसलिए कैपेक्स को केवल 11.21 लाख करोड़ रुपये नहीं कहा जाना चाहिए।
क्या इतना सरकारी पूंजीगत खर्च जरूरी जीडीपी ग्रोथ के लिए पर्याप्त है?
बिल्कुल ठीक है। इस बजट में केंद्र की कुल उधारी 15 लाख 68 हजार करोड़ रुपये की है। हमारा कैपेक्स 15 लाख 48 हजार करोड़ रुपये का है। इस तरह लगभग पूरा उधार हम पूंजीगत खर्च के लिए ले रहे हैं। यानी उधार लेकर उसे कंज्यूम नहीं किया जाना है। उससे बुनियादी ढांचा ही तैयार करना है। यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी बात होती है।अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप जिस तरह इंपोर्ट टैरिफ बढ़ाने की बात कर रहे हैं, क्या उनको सिग्नल देने के लिए प्रीमियम बाइक्स सहित कई चीजों पर कस्टम्स ड्यूटी घटाई गई है?
यह प्रक्रिया पिछले साल जुलाई के बजट से ही शुरू हो गई थी। हमने कई कस्टम्स रेट भी हटाए हैं। हमने अपने हिसाब से सोच-समझकर भी किया है और एक तरह से सिग्नल भी दे दिया है कि हम लोग ज्यादा की ओर नहीं जा रहे। वैसे ट्रंप ने भारत के बारे में कुछ साफ कहा नहीं है, इसलिए हमारी ओर से किसी रिएक्शन का सवाल ही नहीं उठता।











