इस उपचुनाव में बसपा का प्रत्याशी नहीं होने से यह माना जा रहा है कि बसपा का वोटर जिधर जाएगा उसका पलड़ा भारी होगा। उपचुनाव में मतदान से पहले बसपा ने बड़ा सियासी दांव चल दिया है। बसपाई या तो घर बैठेंगे और यदि बूथ तक जाएंगे तो नोटा दबाएंगे। बसपा के इस निर्णय से घोसी के उपचुनाव में एक अलग स्थित होगी क्योंकि इस सीट पर दलित मतदाताओं की संख्या बहुत है जो चुनाव को प्रभावित करने का दम रखते हैं।
बसपा उपचुनाव का विरोध करती है: विश्वनाथ पाल
बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल का कहना है कि हमारी पूरी टीम आने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर लगी है। इस उपचुनाव में राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश के मुताबिक हमारे लोग भाग नहीं लेंगे। चूंकि यह चुनाव प्रलोभन देकर विधायक तोड़कर हो रहा है जिसका भार जनता पर जा रहा है, इसलिए हम इसका विरोध करते हैं। बसपा के लोग अगर अपने मत का प्रयोग करेंगे तो सिर्फ नोटा का ऑप्शन ही प्रयोग में लाएंगे।
दलित मतदाता निर्णायक भूमिका में रहेंगे
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रसून पांडेय कहते हैं कि घोसी उपचुनाव में भले ही मुकबला सपा और भाजपा के बीच में है, लेकिन बसपा का वोटर इस चुनाव का गेमचेंजर होगा। पिछले चुनाव की स्थित यही बयां कर रही है। बीते तीन चुनाव के परिणाम भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं। राजनीतिक दलों के आंकड़ों की मानें तो यहां बसपा की पकड़ अब भी मजबूत दिखाई दे रही है। 2017 में बसपा के अब्बास अंसारी को 81,295 मत मिले थे। जबकि 2019 के उपचुनाव में बसपा के अब्दुल कय्यूम अंसारी को 50,775 वोट मिले थे। 2022 में यहां बसपा प्रत्याशी वसीम इकबाल को 54,248 मत मिले थे। इन आंकड़ों से यही पता चलता है कि दलित मतदाता यहां निर्णायक भूमिका में हैं।
2019 में दूसरे नंबर पर थे सुधाकर सिंह
ज्ञात हो कि चुनाव में भाजपा ने सपा छोड़कर पार्टी में शामिल हुए पूर्व विधायक और मंत्री दारा सिंह चौहान को ही प्रत्याशी बनाया है। वहीं सपा ने क्षत्रिय समाज के सुधाकर सिंह पर दांव लगाया है। सुधाकर सिंह 2017 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़कर तीसरे और 2019 में निर्दलीय चुनाव लड़कर दूसरे स्थान पर रहे थे। इस उप चुनाव में 4,30,391 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इनमें 2,31,536 पुरुष और 1,98,825 महिला मतदाता है।घोसी में 90 हजार दलित मतदाता
राजनीतिक दलों के आंकड़ों की मानें तो इस क्षेत्र में सर्वाधिक करीब 90 हजार दलित मतदाता हैं। क्षेत्र में करीब 90 हजार मुस्लिम मतदाता बताए जाते हैं। पिछड़े वर्ग में 50 हजार राजभर, 45 हजार नोनिया चौहान, करीब 20 हजार निषाद, 40 हजार यादव, 5 हजार से अधिक कोइरी और करीब 5 हजार प्रजापति वर्ग के वोट हैं। अगड़ी जातियों में 15 हजार से अधिक क्षत्रिय, 20 हजार से अधिक भूमिहार, 8 हजार से ज्यादा ब्राह्मण और 30 हजार वैश्य मतदाता हैं।











