वेस्टइंडीज के प्लेयर्स निकोलस पूरन, जेसन होल्डर और काइल मेयर्स ने बोर्ड के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है। हालांकि ये तीन खिलाड़ी टीम के लिए सभी टी20 इंटरनेशनल मैचों के लिए उपलब्ध होंगे। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने रविवार, 10 दिसंबर को इसका खुलासा किया।
2024 में इंडियन प्रीमियर लीग के ठीक बाद जून में वेस्टइंडीज और अमेरिका साथ टी-20 वर्ल्ड कप की मेजबानी करेगा।
मेंस टीम के चार प्लेयर्स को पहली बार पेश किया गया कॉन्ट्रैक्ट
वेस्टइंडीज मेंस टीम के चार खिलाड़ियों के लिए बोर्ड पहली बार कॉन्ट्रैक्ट की पेश किया है। इसमें बाएं हाथ के स्पिनर गुडाकेश मोती, दाएं हाथ के बल्लेबाज कैसी कार्टी, बाएं हाथ के बैटर तेगनारायण चंद्रपॉल और ऑलराउंडर एलिक एथनॉज शामिल हैं।
वेस्टइंडीज विमेंस टीम ने, ऑलराउंडर जैदा जेम्स और शेनेटा ग्रिमोंडको को पहली बार अनुबंध की पेशकश की है।
टी-20 वर्ल्ड कप के लिहाज से प्लेयर्स को कॉन्ट्रैक्ट ऑफर किए - हेन्स
बोर्ड को चीफ सेलेक्टर डेसमंड हेन्स ने कहा कि, क्रिकेट कैलेंडर में इस सीजन वेस्टइंडीज को कई मैच खेलने हैं। इसे देखते हुए हमने टीम के दोनों कोच (टी-20/वनडे और टेस्ट) से बातचीत की। बोर्ड ने आगामी टी-20 वर्ल्ड कप को देखते हुए ही प्लेयर्स को कॉन्ट्रैक्ट दिया है।
उन्होंने आगे कहा, हमारे पास ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज भी हैं। जबकि वनडे फॉर्मेट के लिए हम 2027 वर्ल्ड कप को देखते हुए नई टीम बनाना चाहते हैं।
आंद्रे रसेल 2 साल बाद नेशनल टीम में शामिल
आंद्रे रसेल को 2021 टी-20 वर्ल्ड कप के बाद पहली बार वेस्टइंडीज के टी-20 टीम में शामिल किया है। हांलाकि वें सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा नहीं हैं। कैरेबिया में अगले हफ्ते की पांच मैचों की सीरीज में इंग्लैंड का सामना करने के लिए टीम ने 15 सदस्यीय स्क्वाड जारी किया है, जिसमें रसेल भी शामिल हैं।
वेस्टइंडीज ने लगातार 2 ICC टूर्नामेंट में क्वालिफाइ नहीं किया
वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम में पिछले 2-3 में बड़ी गिरावट आई है। टीम 2022 टी-20 वर्ल्ड कप और 2023 वनडे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाइ करने में असमर्थ रही। वहीं, टेस्ट क्रिकेट में भी टीम का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा।
वेस्टइंडीज क्रिकेट के डाउनफॉल के क्या कारण रहे?
- युवा क्रिकेट से दूर हुए- कैरेबियन आईलैंड्स पर एथलेटिक्स, बास्केटबॉल और फुटबॉल जैसे खेलों ने युवाओं को आकर्षित किया। इससे क्रिकेट प्लेयर्स मिलने कम हो गए। जमैका के उसेन बोल्ट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
- आर्थिक तंगी- वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड अपने खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से मजबूत नहीं बना सका। 2016 में खिलाड़ियों ने बोर्ड के खिलाफ ही बगावत कर दी। खिलाड़ी अपने खर्च पर टी-20 वर्ल्ड कप खेलने भारत पहुंचे और खिताब भी जीता।
- विदेशी लीग को प्राथमिकता दी- पैसा कम मिलने से खिलाड़ी फ्रेंचाइजी क्रिकेट को प्राथमिकता देने लगे। बोर्ड ने भी अपने खिलाड़ियों को टीम में मौका नहीं दिया। जिस कारण आंद्रे रसेल, सुनील नरेन, शिमरोन हेटमायर जैसे खिलाड़ी उपलब्ध होने के बावजूद टीम का हिस्सा नहीं रहे।
- मैनेजमेंट कमजोर- प्लेयर्स की प्रतिभा पर अब भी शक नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों को एकजुट करने वाले कप्तान की कमी है। वेस्टइंडीज बोर्ड अपने खिलाड़ियों को मैनेज भी नहीं कर पा रहा है।
- युवा खिलाड़ी तैयार नहीं हो रहे- बोर्ड युवा खिलाड़ियों को तैयार करने पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा। इससे टेस्ट और वनडे जैसे ट्रेडिशनल फॉर्मेट में टीम को उबरने में लंबा समय लग जाएगा।











