रूस को करना पड़ रहा संघर्ष
भारत के साथ कारोबार करके रूस ने अरबों डॉलर रुपये की संपत्ति जमा कर ली है। लेकिन इसका इस्तेमाल करने के लिए उसे संघर्ष करना पड़ रहा है। इस मुद्रा का वह भारत के अलावा किसी अन्य देश के साथ इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। इधर पिछले वर्ष में चीन की करेंसी युआन की मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे में अर्थव्यवस्था इंपोर्ट के लिए चीन पर ज्यादा निर्भर हो गई है। इसके चलते रूस के कारोबारी अपना ज्यादातर बिजनस युआन में ही कर रहे हैं। इस वर्ष रूस में डॉलर की जगह चीनी मुद्रा सबसे ज्यादा कारोबार वाली करेंसी बन गई है।
रूस को करना पड़ रहा संघर्ष
भारत के साथ कारोबार करके रूस ने अरबों डॉलर रुपये की संपत्ति जमा कर ली है। लेकिन इसका इस्तेमाल करने के लिए उसे संघर्ष करना पड़ रहा है। इस मुद्रा का वह भारत के अलावा किसी अन्य देश के साथ इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। इधर पिछले वर्ष में चीन की करेंसी युआन की मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे में अर्थव्यवस्था इंपोर्ट के लिए चीन पर ज्यादा निर्भर हो गई है। इसके चलते रूस के कारोबारी अपना ज्यादातर बिजनस युआन में ही कर रहे हैं। इस वर्ष रूस में डॉलर की जगह चीनी मुद्रा सबसे ज्यादा कारोबार वाली करेंसी बन गई है।











