बांग्लादेश में बीते साल जून-जुलाई में शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इसके बाद 5 अगस्त में शेख हसीना ने देश छोड़ दिया और भारत में शरण ले ली। हसीना सरकार गिरने पर यूनुस अंतरिम नेता बने और जनरल जमां ने उनका समर्थन किया। इसके बाद से यूनुस ने जहां चुनाव टालने की कोशिश की है, वहीं जनरल जमां ने साफ किया है इसी साल चुनाव हों। उनका कहना है कि देश का भविष्य सिर्फ चुनी हुई सरकार तय करगी।
वकार उज जमां कौन हैं? यूनुस को सरकार की कमान सौंपने वाले आर्मी चीफ ही कैसे बन गए उनका बुरा सपना
ढाका: बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा रहा है। बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार उज जमां और अंतरिम सरकार के हेड मोहम्मद यूनुस के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं। जनरल जमां ने यूनुस को दिसंबर तक चुनाव कराने का अल्टीमेटम दिया है। सरकार के म्यांमार तक कॉरिडोर बनाने के अहम प्रोजेक्ट का भी सेना प्रमुख ने कड़ा विरोध किया है। इससे यूनुस भड़क गए हैं और राजनीतिक दलों का समर्थन नहीं मिलने पर इस्तीफा की धमकी दी है। दिलचस्प बात ये है कि आमने-सामने दिख रहे जमां और यूनुस बीते साल अगस्त में हसीना सरकार गिरने के बाद एक-दूसरे के साथ खड़े थे। जनरल जमां की रजामंदी से ही यूनुस को अंतरिम सरकार की कमान मिली लेकिन अब उनकी वजह से ही उनको इस्तीफा देना पड़ सकता है।
बांग्लादेश में बीते साल जून-जुलाई में शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इसके बाद 5 अगस्त में शेख हसीना ने देश छोड़ दिया और भारत में शरण ले ली। हसीना सरकार गिरने पर यूनुस अंतरिम नेता बने और जनरल जमां ने उनका समर्थन किया। इसके बाद से यूनुस ने जहां चुनाव टालने की कोशिश की है, वहीं जनरल जमां ने साफ किया है इसी साल चुनाव हों। उनका कहना है कि देश का भविष्य सिर्फ चुनी हुई सरकार तय करगी।
बांग्लादेश में बीते साल जून-जुलाई में शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इसके बाद 5 अगस्त में शेख हसीना ने देश छोड़ दिया और भारत में शरण ले ली। हसीना सरकार गिरने पर यूनुस अंतरिम नेता बने और जनरल जमां ने उनका समर्थन किया। इसके बाद से यूनुस ने जहां चुनाव टालने की कोशिश की है, वहीं जनरल जमां ने साफ किया है इसी साल चुनाव हों। उनका कहना है कि देश का भविष्य सिर्फ चुनी हुई सरकार तय करगी।











