सरकार ने राज्य के 28 जिलों में कैबिनेट मंत्री को ध्वजारोहण की जिम्मेदारी दी है। एनसीपी का पुणे में दबदबा है, इसिलए वह पुणे का पालक मंत्री पद मांग रही है। लेकिन बीजेपी का भी यहां पर दावा है। इसलिए पहले तय किया गया कि चंद्रकांत पाटील पुणे में झंडा फहराएंगे। लेकिन बाद में अजित पवार और फडणवीस के बीच इस पर चर्चा हुई और फैसला बदलकर चंद्रकांत पाटील की जगह पुणे में राज्यपाल रमेश बैस के हाथों ध्वजारोहण कराने का फैसला लिया गया। छगन भुजबल नाशिक जिले में ध्वजारोहण करने इच्छुक थे, लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई। उन्हें अमरावती जिले की जिम्मेदारी दी गई है।
कौन कहां करेगा झंडा वंदन?
शुक्रवार को राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी परिपत्र के अनुसार, मुंबई शहर के मंत्रालय में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ध्वजारोहण करेंगे। मुंबई उपनगर में मंगल प्रभात लोढा, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर में ध्वजारोहण करेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री अजित पवार कोल्हापुर में झंडा वंदन करेंगे। राज्य के सार्वजनिक निर्माण कार्य मंत्री रवींद्र चव्हाण ठाणे, खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल अमरावती, वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार चंद्रपुर, उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील रायगड, सहकारिता मंत्री दिलीप वलसे-पाटील वाशिम, राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटील अहमदनगर, ग्रामीण विकास मंत्री गिरीश महाजन नाशिक, एमएसआरडीसी मंत्री दादाजी भुसे धुलिया, जलापूर्ति व स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील जलगांव में ध्वजारोहण करेंगे।
हिंगोली, वर्धा, गोंदिया, भंडारा, अकोला और नांदेड में जिलाधिकारियों को ध्वजारोहण की जिम्मेदारी दी गई है। तीन दलों की सरकार में पुणे, नाशिक, रायगड और कोल्हापुर जिले में ध्वजारोहण को लेकर विवाद है। एनसीपी इन जिलों के पालकमंत्री पद मांग रही है।
शुक्रवार को राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी परिपत्र के अनुसार, मुंबई शहर के मंत्रालय में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ध्वजारोहण करेंगे। मुंबई उपनगर में मंगल प्रभात लोढा, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर में ध्वजारोहण करेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री अजित पवार कोल्हापुर में झंडा वंदन करेंगे। राज्य के सार्वजनिक निर्माण कार्य मंत्री रवींद्र चव्हाण ठाणे, खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल अमरावती, वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार चंद्रपुर, उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील रायगड, सहकारिता मंत्री दिलीप वलसे-पाटील वाशिम, राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटील अहमदनगर, ग्रामीण विकास मंत्री गिरीश महाजन नाशिक, एमएसआरडीसी मंत्री दादाजी भुसे धुलिया, जलापूर्ति व स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील जलगांव में ध्वजारोहण करेंगे।
हिंगोली, वर्धा, गोंदिया, भंडारा, अकोला और नांदेड में जिलाधिकारियों को ध्वजारोहण की जिम्मेदारी दी गई है। तीन दलों की सरकार में पुणे, नाशिक, रायगड और कोल्हापुर जिले में ध्वजारोहण को लेकर विवाद है। एनसीपी इन जिलों के पालकमंत्री पद मांग रही है।
पालक मंत्री होने का मतलब
किसी जिले का पालक मंत्री यानी प्रभारी मंत्री होना प्रशासनिक व्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण होता है। जिस जिले का जो पालक मंत्री होता है, वही उस जिले की विकास योजनाओं को फाइनल करता है। उस जिले की जिला नियोजन और विकास समिति (डीपीडीसी) की बैठकों की वह अध्यक्षता करता है। डीपीडीसी का बैठकों में ही जिले के विकास कार्यों के लिए सरकारी योजनाओं का निर्धारण होता है। जिस पार्टी का पालक मंत्री होता है, वह अपनी पार्टी के प्रभाव वाले इलाकों के लिए ज्यादा से ज्यादा योजनाएं स्वीकृत करता है।
यानी सारा मसला जिले के विकास के फंड पर ज्यादा से ज्यादा कब्जे का है, इसलिए पालक मंत्री पद के लिए सरकार में शामिल तीनों पार्टियों के बीच गलाकाट लड़ाई चल रही है। झंडा वंदन के लिए तो अजित पवार कोल्हापुर और छगन भुजबल अमरावती जाने को तैयार हो गए हैं, लेकिन जब अधिकृत रूप से पालक मंत्री पदों का बंटवारा होगा, तब इसे लेकर घमासान देखने को मिले तो आश्चर्य नहीं होगा।
किसी जिले का पालक मंत्री यानी प्रभारी मंत्री होना प्रशासनिक व्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण होता है। जिस जिले का जो पालक मंत्री होता है, वही उस जिले की विकास योजनाओं को फाइनल करता है। उस जिले की जिला नियोजन और विकास समिति (डीपीडीसी) की बैठकों की वह अध्यक्षता करता है। डीपीडीसी का बैठकों में ही जिले के विकास कार्यों के लिए सरकारी योजनाओं का निर्धारण होता है। जिस पार्टी का पालक मंत्री होता है, वह अपनी पार्टी के प्रभाव वाले इलाकों के लिए ज्यादा से ज्यादा योजनाएं स्वीकृत करता है।
यानी सारा मसला जिले के विकास के फंड पर ज्यादा से ज्यादा कब्जे का है, इसलिए पालक मंत्री पद के लिए सरकार में शामिल तीनों पार्टियों के बीच गलाकाट लड़ाई चल रही है। झंडा वंदन के लिए तो अजित पवार कोल्हापुर और छगन भुजबल अमरावती जाने को तैयार हो गए हैं, लेकिन जब अधिकृत रूप से पालक मंत्री पदों का बंटवारा होगा, तब इसे लेकर घमासान देखने को मिले तो आश्चर्य नहीं होगा।











