नई दिल्ली: अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग (Hindenburg) की अडानी ग्रुप पर गड़बड़ी के आरोप लगाने वाली रिपोर्ट के बाद अब OCCRP ने अडानी ग्रुप पर किया नया खुलासा किया है। आर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने अडानी ग्रुप पर नया बम फोड़ा है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अडानी ग्रुप ने गुपचुप तरीके से खुद अपने शेयर खरीदकर स्टॉक एक्सचेंज में लाखों डॉलर का निवेश किया। इसमें अडानी ग्रुप के मॉरीशस में किए गए ट्रांजेक्शंस की डिटेल का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रुप की कंपनियों ने साल 2013 से 2018 तक गुपचुप तरीके से अपने शेयरों को खरीदा। हालांकि अडानी ग्रुप ने एक बयान जारी कर आर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट के आरोपों का खंडन किया है।
कौन है ओसीसीआरपी
आर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) खोजी पत्रकारों का एक ग्लोबल नेटवर्क है। ओसीसीआरपी की स्थापना साल 2006 में हुई थी। ओसीसीआरपी का गठन एशिया, यूरोप, अफ्रीका और लातिनी अमेरिका में फैले 24 गैर-लाभकारी जांच केंद्रों ने किया है। ओसीसीआरबी को अरबपति इंवेस्टर जॉर्ज सोरोस (George Soros) और रॉकफेलर ब्रदर्स फंड जैसे लोगों से फंडिंग मिलती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉर्ज सोरोस को मोदी सरकार का कट्टर विरोधी माना जाता है। वे समय-समय पर मोदी सरकार की आलोचना करते रहते हैं। जॉर्ज अपनी इकाई ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के माध्यम से ओसीसीआरपी की फंडिंग करते हैं। इसके अलावा फोर्ड फाउंडेशन, रॉकफेलर ब्रदर्स फंड और ओक फाउंडेशन से भी ग्रुप को फंडिंग मिलती है।
एजेंसियों की रहती है नजर
ओसीसीआरपी ऑर्गेनाइज्ड क्राइम पर बेस्ड रिपोर्टिंग में एक्सपर्टीज का दावा करता है। यह मीडिया घरानों के साथ साझेदारी के माध्यम से आर्टिकल पब्लिश करता है। भारतीय रेगुलेटरी एजेंसीज इस रिपोर्ट के रिलीज होने से पहले से ही घरेलू फाइनेंशियल मार्केट्स पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव पर बारीक नजर बनाए हुए है।
जॉर्ज का विवादों से पुराना नाता
अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस का विवादों से पुराना नाता रहा है। वो प्रधानमंत्री मोदी को लेकर पहले भी विवाद बयान देते रहे है। केवल पीएम मोदी पर ही नहीं बल्कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, डोनाल्ट ट्रंप पर भी विवादित बयान दे चुके हैं। सोरोन पर अलग-अलग देशों की राजनीति और कारोबार को प्रभावित करने के लिए अपनी दौलत का इस्तेमाल करने का आरोप लगता रहा है।