कौन हैं आम्रपाली के वो 1100 फ्लैट खरीदार जिनको कोर्ट ने जारी किया है नोटिस, 15 अक्टूबर तक करना होगा ये काम

कौन हैं आम्रपाली के वो 1100 फ्लैट खरीदार जिनको कोर्ट ने जारी किया है नोटिस, 15 अक्टूबर तक करना होगा ये काम
नई दिल्ली: आम्रपाली परियोजनाओं (Amrapali Projects) के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिसीवर ने करीब 1,100 घर खरीदारों को "अंतिम" नोटिस जारी किया है। इन खरीदारों ने अभी तक उन दस्तावेजों को सत्यापित नहीं किया है, जिनके आधार पर उन्हें फ्लैट आवंटित किए गए थे और जिन्होंने कागजात की जांच के बाद भी अपनी यूनिट पर कब्जा नहीं किया है। बता दें चूंकि इसके प्रमोटरों को जेल हुई थी। इसके चलते आम्रपाली समूह (Amrapali Group) की अटकी परियोजनाओं को शीर्ष अदालत की निगरानी में सरकार समर्थित निर्माण कंपनी एनबीसीसी (NBCC) द्वारा पूरा किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि कंपनी ने पहले ही कोर्ट रिसीवर को तैयार हो चुके फ्लैटों की एक सूची दे दी थी। जिन परियोजनाओं में ये फ्लैट तैयार हैं उनमें सेंचुरियन पार्क, ड्रीम वैली 1, लेजर वैली, प्लैटिनम, प्रिंसली एस्टेट, सफायर 1 और 2, सिलिकॉन सिटी 1 और 2 और जोडिएक शामिल हैं।

इस तरह से मिलेगी एनओसी

नियमों के मुताबिक, खरीदारों को अब कोर्ट रिसीवर, वरिष्ठ वकील आर वेंकटरमणी के कार्यालय में जाना होगा। यहां खरीदारों को यह साबित करने के लिए दस्तावेज जमा करने होंगे कि उनके खिलाफ कोई बकाया नहीं है। एक बार ऐसा हो जाने पर, उन्हें अपने फ्लैटों पर कब्ज़ा करने के लिए एनओसी दी जाएगी। हालांकि 828 खरीदार ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक अपने भुगतान से संबंधित दस्तावेज़ जमा नहीं किए हैं। कुल 243 खरीदारों ने कोर्ट रिसीवर से एनओसी ले ली है, लेकिन अभी तक नए फ्लैट पर कब्जा नहीं किया है। जिन लोगों ने अपने दस्तावेज जमा नहीं किए हैं, उन्हें अब 15 अक्टूबर तक ऐसा करने के लिए कहा गया है। जिन खरीदारों ने एनओसी हासिल कर ली है, उन्हें 20 सितंबर तक अपने फ्लैट पर कब्जा लेने के लिए कहा गया है।

देना पड़ सकता है जुर्माना

दोनों मामलों में, यदि खरीदार या तो कागजात जमा करने में विफल रहते हैं या अपने फ्लैट पर कब्जा करने में विफल रहते हैं, तो अगले 30 दिनों तक 2,500 रुपये का दैनिक जुर्माना लगाया जाएगा। 30 दिन की समय सीमा समाप्त होने के बाद आवंटन रद्द भी किया जा सकता है। 23 अगस्त को दिए गए नोटिस में कहा गया है कि "ऐसी रद्द की गई इकाइयों को बिना बिकी हुई इन्वेंट्री के रूप में माना जाएगा। इसके बाद, ऐसी इकाइयों के खिलाफ कोई दावा नहीं किया जाएगा और सूची सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट की जाएगी।"

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