भारत-कनाडा के बीच कब ठीक होंगे रिश्‍ते, वीजा प्रतिबंधों में ढील के बाद भी तनाव, टेंशन में विशेषज्ञ

भारत-कनाडा के बीच कब ठीक होंगे रिश्‍ते, वीजा प्रतिबंधों में ढील के बाद भी तनाव, टेंशन में विशेषज्ञ
ओटावा: भारत की तरफ से पिछले दिनों कनाडा के लिए कुछ श्रेणी में वीजा फिर से जारी करने का आदेश दिया गया है। लेकिन इसके बाद भी माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच रिश्‍ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। अधिकारियों और विशेषज्ञों की मानें तो कनाडा के नागरिकों पर कुछ वीजा प्रतिबंधों को कम करने का फैसला भारत का एक हैरान करने वाला कदम था। लेकिन इसके बावजूद भारत और कनाडा के बीच बिगड़े राजनयिक संबंधों को सुधारना एक लंबी प्रक्रिया होगी। उनकी मानें तो दोनों देशों ने 18 सितंबर के बाद जो रुख अपनाया वह सीमा के परे था और इसकी कल्‍पना कभी किसी ने नहीं की थी।

सुधार की उम्‍मीदें बढ़ीं लेकिन...
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 18 सितंबर को संसद में कहा था कि खालिस्‍तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्‍जर की हत्‍या में भारतीय एजेंट्स शामिल थे। इसके बाद भारत ने नाराजगी जताते हुए वीजा सेवाओं को निलंबित कर दिया था। इसके कुछ हफ्ते बाद वीजा सेवाओं को आंशिक रूप से बहाल किया गया है। भारत ने ट्रूडो के आरोपों का मजबूती के साथ खंडन भी किया। लेकिन तब तक संबंध तनावपूर्ण हो चुके थे। दोनों देशों के बीच दशकों के बाद रिश्‍ते इतने खराब हुए हैं। न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दोनों देशों के अधिकारियों और विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि वीजा पर भारत की छूट से संबंधों में सुधार की कुछ उम्मीदें बढ़ गई हैं। लेकिन यह कोई सफलता नहीं है, क्योंकि किसी भी पक्ष के पास सामान्य स्थिति में वापसी के लिए ज्यादा कोई बहुत ज्‍यादा प्रोत्‍साहित करने वाले विकल्‍प नहीं हैं।

गहरे संकट में हैं रिश्‍ते
उनका कहना है कि न तो भारत और न ही कनाडा ने संबंधों को जल्‍द सामान्‍य करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए हैं। अमेरिका के वॉशिंगटन में स्थित विल्‍सन सेंटर के साउथ एशिया इंस्‍टीट्यूट के डायरेक्‍टर माइकल कुगलमैन की मानें तो दोनों देशों के रिश्‍ते गहरे संकट में हैं और शायद अब सबसे ज्‍यादा खराब हैं। उनका कहना है कि हर पक्ष चाहता है कि संकट नियंत्रण से बाहर न हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस संकट को सुलझाने के लिए मजबूत प्रयास किए जा रहे हों। साल 2020 से 2022 तक कनाडा में भारत के राजदूत के तौर पर तैनात रहे अजय बिसारिया ने कहा है कि रिश्‍ते इस समय 'डिएस्‍कलेशन' के दौर में हैं और 'शांत कूटनीति' के तहत इन कोशिशों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

कनाडा बोला, भारत के साथ लंबे रिश्‍ते
भारत और कनाडा के अधिकारियों की मानें तो भारत सरकार की तरफ से जब वीजा प्रतिबंध लगाए गए तो उन हजारों भारतीयों और कनाडा के नागरिकों के लिए बड़ी मुसीबत पैदा हो गई जो कनाडा में रहते हैं या फिर वहां पर पढ़ाई के लिए जाते हैं। कनाडा के विदेश मंत्रालय ने 30 अक्टूबर को विदेश मंत्री मेलानी जोली की टिप्पणी की तरफ इशारा किया।जोली ने कहा था, 'जब भारत की बात आती है तो हम दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ सोचते हैं। यह एक ऐसा रिश्ता है जो दशकों तक चला है और हम सभी जानते हैं कि हमारे देश के लोगों के बीच बहुत मजबूत संबंध हैं।'

गहरे संकट में हैं रिश्‍ते
उनका कहना है कि न तो भारत और न ही कनाडा ने संबंधों को जल्‍द सामान्‍य करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए हैं। अमेरिका के वॉशिंगटन में स्थित विल्‍सन सेंटर के साउथ एशिया इंस्‍टीट्यूट के डायरेक्‍टर माइकल कुगलमैन की मानें तो दोनों देशों के रिश्‍ते गहरे संकट में हैं और शायद अब सबसे ज्‍यादा खराब हैं। उनका कहना है कि हर पक्ष चाहता है कि संकट नियंत्रण से बाहर न हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस संकट को सुलझाने के लिए मजबूत प्रयास किए जा रहे हों। साल 2020 से 2022 तक कनाडा में भारत के राजदूत के तौर पर तैनात रहे अजय बिसारिया ने कहा है कि रिश्‍ते इस समय 'डिएस्‍कलेशन' के दौर में हैं और 'शांत कूटनीति' के तहत इन कोशिशों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

कनाडा बोला, भारत के साथ लंबे रिश्‍ते
भारत और कनाडा के अधिकारियों की मानें तो भारत सरकार की तरफ से जब वीजा प्रतिबंध लगाए गए तो उन हजारों भारतीयों और कनाडा के नागरिकों के लिए बड़ी मुसीबत पैदा हो गई जो कनाडा में रहते हैं या फिर वहां पर पढ़ाई के लिए जाते हैं। कनाडा के विदेश मंत्रालय ने 30 अक्टूबर को विदेश मंत्री मेलानी जोली की टिप्पणी की तरफ इशारा किया।जोली ने कहा था, 'जब भारत की बात आती है तो हम दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ सोचते हैं। यह एक ऐसा रिश्ता है जो दशकों तक चला है और हम सभी जानते हैं कि हमारे देश के लोगों के बीच बहुत मजबूत संबंध हैं।'
Advertisement