यह बात साल 1830 की है। अमेरिका का बाल्टीमोर एंड ओहियो रेलरोड तब घोड़ों के सहारे चल रहा था। इनवेस्टर्स चाहते थे कि घोड़ों की जगह इंजन के यह काम कराया जाए। लेकिन ब्रिटेन के इंजीनियरों को संदेह था कि स्टीम से चलने वाला इंजन खड़ी चढ़ाई और तेज मोड़ों पर काम कर पाएगा। आखिर यह इंजन बनाने की जिम्मेदारी इनवेंटर और बिजनसमेन पीटर कूपर (Peter Cooper) को दी गई। 39 साल के कूपर ने एक एफिशियंट स्टीम इंजन बनाया और इसे टॉम थंब (Tom Thumb) नाम दिया। यह इंजन 18 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता था। यानी यह घोड़े की तुलना में कहीं ज्यादा फास्ट था। लेकिन घोड़ों से गाड़ी खींचने का काम करने वाले ऑपरेटर्स को यह बात पसंद नहीं आई। उन्होंने पीटर कूपर को रेस लगाने की चुनौती दी जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
कैसे जीता घोड़ा
जैसे ही रेस शुरू होने का सिग्नल मिला, घोड़े ने रेस लगा दी। दूसरी ओर भाप के इंजन को शुरू होने में देर लगी। जब तक इंजन शुरू हो पाता घोड़ा आधा मील निकल चुका था। आखिरकार इंजन शुरू हुआ और जल्दी ही इसने घोड़े को पीछे छोड़ दिया। अभी यह लीड बना ही रहा था कि एक अनहोनी हो गई। इसका लेदर ब्लोअर बेल्ट पहिये से निकल गया और इंजन रुक गया। जब तक कूपर इसे ठीक करते तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घोड़ा रेस जीत चुका था। लेकिन कूपर ने हार नहीं मानी और अगले साल इसमें सुधार करके नया स्टीम लोकोमोटिव बनाया। यह 30 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता था। साल 1831 में बाल्टीमोर में इसका ट्रायल सफल रहा।इसके बाद अमेरिका में ट्रेन को खींचने के लिए घोड़ों की जगह इस इंजन का इस्तेमाल होने लगा। बाद में भाप इंजन की जगह डीजल इंजन आया और फिर इलेक्ट्रिक इंजन ने जगह बनाई। आज बुलेट ट्रेन 250 मील प्रति घंटे की स्पीड से फर्राटा भर रही हैं लेकिन जल्दी ही इनका जमाना भी लद सकता है। एलन मस्क (Elon Musk) का दावा है कि उनका हाइपरलूप (Hyperloop) 670 मील प्रति घंटे की रफ्तार से ज्यादा तेजी से चल सकता है। कूपर का आविष्कार सफल रहा लेकिन उन्होंने फिर कोई और लोकोमोटिव नहीं बनाया। इसके बजाय उन्होंने दूसरे वेंचर्स का रुख किया। उनकी रोलिंग मिल अमेरिका में आई-बीम्स बनाने वाली पहली कंपनी थी।











