कमलनाथ की टिप्पणी को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया: दिग्विजय
दिग्विजय ने बीते दिन कमलनाथ के बयान पर मीडिया के बात करते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ के पेश किया गया। यह देश सभी का है। हमारे देश में हिंदुओं के साथ-साथ मुसलमान, ईसाई, सिख, जैन और बौद्ध भी हैं। सभी धर्मों के लोगों ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी। क्या अशफाक उल्ला खान को शहीद भगत सिंह के साथ फांसी नहीं दी गई थी? दिग्विजय ने कहा कि यह देश सभी का है। दिग्विजय का बयान कमलनाथ के बयान के बाद आया था।दरअसल कमलनाथ से पूछा गया था कि क्या वह हिंदू राष्ट्र के लिए धीरेंद्र शास्त्री के आह्वान का समर्थन करते हैं? इसके जवाब में कमलनाथ ने कहा था- ' इसमें बहस करने के लिए क्या है? हम पहले से ही 82% हिंदुओं के साथ एक राष्ट्र हैं। अगर किसी देश में इतनी बड़ी हिंदू आबादी है, तो यह दावा करने के लिए क्या है कि हम एक हिंदू राष्ट्र हैं? की जरूरत ही नहीं है। आंकड़े यह सब कहते हैं।
कमलनाथ, दिग्विजय के बयान से एमपी कांग्रेस में दरार?
चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के दो दिग्गज नेताओं के बयानों से सवाल खड़े होने लगे हैं। बीजेपी की ओर से पूछा जा रहा है कि दिग्विजय किसे इस्तीफा देने के लिए कह रहे थे? बीजेपी ने दोनों नेताओं के बयान को कांग्रेस में दरार के सबूत के रूप में पेश किया। बीजेपी ने कहा कि दिग्विजय सिंह किसी और का नहीं, बल्कि कमलनाथ का इस्तीफा मांग रहे थे।हालांकि, बुधवार को दिग्विजय ने हिंदू राष्ट्र पर कमलनाथ के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के लिए मीडिया और बीजेपी को दोषी ठहराया। दिग्विजय ने कहा कि कमलनाथ ने जो कहा उसे मीडिया ने गलत तरीके से पेश किया। क्या संविधान में हिंदुत्व का कोई उल्लेख है? हिंदू आबादी की संख्या पर बोलना कोई पाप नहीं है। लेकिन देश संविधान के अनुसार चलेगा। दिग्विजय ने कहा कि प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार के मंत्रियों जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को इस्तीफा दे देना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और बीजेपी के सभी मंत्रियों से पूछना चाहता हूं कि उन्होंने पद ग्रहण करते वक्त भारतीय संविधान की शपथ ली थी या हिंदू राष्ट्र की?
इधर सीएम शिवराज और बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर हमला बोलना शुरू कर दिया। सीएम शिवराज ने कहा कि, 'न तो दिग्विजय और न ही कमलनाथ का हिंदुत्व या राष्ट्र या समाज से कोई लेना-देना है। वोट हासिल करने के लिए, वे ऐसे बयान देते रहते हैं।











