सऊदी अरब का भारत में दो रिफाइनरी बनाने के लिए भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करने का निर्णय महत्वपूर्ण है जिसके कई निहितार्थ हैं। खासकर पाकिस्तान के संदर्भ में। यह सौदा न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि भू-राजनीतिक रूप से भी उसकी ताकत बढ़ाएगा। पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। खास बात यह है कि तमाम देशों के साथ सऊदी अरब ने भी इस आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है।
रिफाइनरी परियोजनाओं में 26% तक हिस्सेदारी खरीदने की बात
ईटी ने अक्टूबर में यह खबर दी थी कि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) अपनी अलग-अलग रिफाइनरी परियोजनाओं में सऊदी अरामको को भागीदार बनाने के लिए बातचीत कर रहे हैं।अरामको दोनों रिफाइनरी परियोजनाओं में 26% तक हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। बीपीसीएल आंध्र प्रदेश में अपनी रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री के लिए एक रिपोर्ट तैयार कर रही है। इस फैक्ट्री की क्षमता 9-12 मिलियन टन सालाना हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, 9 mtpa क्षमता वाली सुविधा की लागत लगभग 95,000 करोड़ रुपये हो सकती है। इसमें कर्ज और इक्विटी का अनुपात 65:35 होने की संभावना है। बीपीसीएल और उसकी सहयोगी को इक्विटी में 33,000 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। परियोजना में 26% इक्विटी हिस्सेदारी के लिए अरामको को लगभग 9,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। ओएनजीसी के साथ इसी तरह का सौदा होने पर अरामको को लगभग 18,000 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ सकता है।
भारतीय कंपनियों ने रखी है शर्त
सूत्रों के अनुसार, भारतीय कंपनियां सऊदी कच्चे तेल (क्रूड) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लेने के लिए तभी सहमत हो सकती हैं जब अरामको कीमत में छूट, माल ढुलाई में छूट या 90 दिनों की क्रेडिट अवधि जैसी रियायतें दे।ओएनजीसी के साथ अरामको की बातचीत अभी शुरुआती दौर में है। सूत्रों के अनुसार, ओएनजीसी परियोजना में 20-49% हिस्सेदारी देने को तैयार है। लेकिन, अरामको अपनी हिस्सेदारी को 26% या उससे कम तक सीमित रखना चाहती है। अभी तक स्थान, रिफाइनरी का ढांचा और निर्माण लागत तय नहीं हुई है। ओएनजीसी उत्तर प्रदेश में 9 mtpa या उससे बड़ी रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स बनाने पर विचार कर रही है। उत्तर प्रदेश में रिफाइनरियों की सप्लाई की तुलना में ईंधन की खपत बहुत अधिक है। ओएनजीसी प्रयागराज के पास जमीन का एक टुकड़ा देख रही है जिसे BPCL ने एक दशक पहले एक रिफाइनरी परियोजना के लिए खरीदा था। लेकिन, उसे कभी विकसित नहीं किया। सूत्रों ने बताया कि ONGC की रिफाइनरी गुजरात में नहीं बनने की संभावना है, क्योंकि राज्य में पहले से ही भारत की एक तिहाई रिफाइनिंग क्षमता मौजूद है।











