आईआरसीटीसी होटल घोटाले का यह मामला यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल का है। उस दौरान लालू यादव रेल मंत्री थे। इस दौरान इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी IRCTC ने पुरी और रांची के बीएनआर होटल के संचालन और रखरखाव का ठेका प्राइवेट कंपनियों को देने की प्रक्रिया शुरू की। सीबीआई का आरोप है कि टेंडर प्रोसेस में हेराफेरी की गई ताकि सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को ठेका मिल सके। इसके बदले में इस होटल कंपनी ने लालू परिवार से जुड़ी एक बेनामी कंपनी को कीमत से कहीं कम रेट पर जमीन दी थी।
पटना की जमीन
सीबीआई के मुताबिक पटना में तीन एकड़ में फैली लगभग 94 करोड़ रुपये की जमीन महज 65 लाख रुपये में बेच दी गई जबकि इसका सर्किल रेट 32 करोड़ रुपये था। यह जमीन किसी बेनामी कंपनी डिजिटल मार्केटिंग लिमिटेड के जरिए ट्रांसफर की गई थी। बाद में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के स्वामित्व वाली लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी ने इस बेनामी कंपनी को खरीद लिया था।सीबीआई ने राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को इस मामले में मुख्य आरोपी बनाया है। उन पर पूरी साजिश रचने का आरोप है। उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर भी लैंड डील में शामिल होने का आरोप है। बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और अभी विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर इस मामले में परिवारिक फायदा लेने का आरोप है। इसके अलावा लालू के करीबी और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेम चंद गुप्ता भी इसमें आरोपी हैं। उनकी पत्नी सरला गुप्ता ही सुजाता होटल्स की मालकिन हैं।











