जुलाई 2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन शुरू हुआ, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। इसी कथित छात्र आंदोलन की आड़ में शेख हसीना की सरकार को गिराया गया। इसके बाद अगस्त 2024 में पूर्व पीएम शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं। इसके बाद ही बांग्लादेश में नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार का गठन हुआ। वहीं यूएन की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में हुई हिंसा में करीब 1,400 लोगों की मौत हो गई
शेख हसीना पर नरसंहार के आरोप
हसीना की तत्कालीन सरकार पर हत्या, अपराध रोकने में नाकामी और मानवता के खिलाफ अपराध के अलावा छात्रों को गिरफ्तार कर टॉर्चर करने, एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग, फायरिंग, और लीथल फोर्स का इस्तेमाल करने का आदेश देने समेत तमाम आरोप लगे है
हसीना को फांसी देने की मांग
बांग्लादेश के प्रॉसिक्यूशन ने शेख हसीना के दोषी पाए जाने पर उनके लिए मृत्युदंड की मांग की है। वहीं, हसीना के खिलाफ लगे इन आरोपों के मामले में सजा की तारीख सुनाने से पहले अवामी लीग ने ढाका लॉकडाउन का ऐलान कर दिया। हसीना मामले में कोर्ट में सुनवाई के बीच किसी अनहोनी या हिंसा के अंदेशे को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई है।
17 नवंबर को सुनाई जाएगी सजा
जस्टिस मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मजूमदार, जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद, और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक इनाम चौधरी की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय बेंच ने मामले में सजा सुनाने की तारीख 17 नवंबर तय की है।











