अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एआई चिप के एक्सपोर्ट को लेकर नए नियम जारी किए हैं। अमेरिका में एनवीडिया (Nvidia) जैसी बड़ी कंपनी चिप बनाती है। नए नियम इस कंपनी के लिए भी हैं। इन नियमों के मुताबिक अमेरिका ने एआई चिप के एक्सपोर्ट को काफी हद तक बैन कर इसे सीमित कर दिया है। अमेरिका इस कदम से चीन की बढ़ती टेक्नोलॉजी को रोकना चाहता है, लेकिन इसकी चपेट में भारत समेत दुनिया के कई देश आ सकते हैं।
कहां होता है चिप का इस्तेमाल?
इस चिप को ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) भी कहा जाता है। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक कार, मोबाइल समेत कई चीजों में किया जाता है। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल और एप्लिकेशन में भी इनका इस्तेमाल काफी होता है।क्या कहा अमेरिका ने?
चिप के एक्सपोर्ट को लेकर अमेरिका ने एक बयान भी जारी किया है। इस बयान के मुताबिक, 'यह नियम सुनिश्चित करता है कि हमारे सहयोगी हमारे हितों की रक्षा करते हुए एडवांस टेक्नोलॉजी तक पहुंच सकें।' दरअसल, अमेरिका चाहता है कि एआई का विकास अमेरिकी मानकों के अनुसार हो। इस कारण अमेरिका चिप पर कंट्रोल करना चाहता है।एनवीडिया ने किया विरोध
अमेरिका के इन नए नियमों का विरोध अमेरिकी कंपनी एनवीडिया ने किया है। एनवीडिया ने कहा कि अमेरिका का यह नियम दुनियाभर में इनोवेशन और आर्थिक विकास को पटरी से उतारने की साजिश है। वहीं चीन ने भी अमेरिका के इस फैसले को गलत ठहराया है।भारत पर क्या पड़ेगा असर?
अमेरिका के इस बैन से भारत पर भी असर पड़ सकता है। रिलायंस ने हाल ही में एनवीडिया को चिप का ऑर्डर दिया है। वहीं दूसरी ओर टाटा कम्युनिकेशंस, योटा डेटा सर्विसेज, ई2ई नेटवर्क्स और Ctrl S आदि को भी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। ये कंपनियां एआई क्लाउड कंप्यूटिंग में विस्तार कर रही हैं। इन्हें चिप की जरूरत पड़ती है। साथ ही सरकार के एआई मिशन पर भी असर दिखाई दे सकता है।अमेरिका ने भारत के लिए चिप की कैपिंग सीमित की है। नए नियमों के मुताबिक भारत समेत 140 देशों को साल 2025-26 में 50 हजार चिप एक्सपोर्ट की जाएंगी। वहीं चीन और रूस समेत 23 देशों पर पूरी तरह बैन लगा दिया है। इसके अलावा अमेरिका ने यूके, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी और स्वीडन पर कोई लिमिट तय नहीं की है।











