क्यों मांगी यह गारंटी?
चीन ने निर्यात नियंत्रण गारंटी की मांग की है, जो वासेनार व्यवस्था (Wassenaar Arrangement) के समान हो। चीन इस समझौते का सदस्य नहीं है। यह समझौता 42 सदस्य देशों के बीच दोहरे उपयोग वाली तकनीकों और सामानों के हस्तांतरण में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बनी रहे। भारत इस समझौते का सदस्य है।सरकार ने अभी स्वीकार नहीं की मांग
एक सूत्र ने बताया कि चीन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भारत को भेजे गए भारी दुर्लभ पृथ्वी चुंबक अमेरिका तक न पहुंचें। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय सरकार ने अभी तक इस मांग को स्वीकार नहीं किया है। एक और सूत्र ने बताया, 'हमारी समझ यह है कि चीन भारी दुर्लभ पृथ्वी चुंबकों पर अमेरिका के साथ किसी तरह के समझौते पर विचार कर रहा है और बिना इस गारंटी के कि माल कहीं और नहीं जाएगा, वह आपूर्ति जारी करने को तैयार नहीं है।'चीन की कितनी हिस्सेदारी?
चीन दुनिया के 90% भारी दुर्लभ पृथ्वी चुंबकों का उत्पादन करता है। उसने इन सामग्रियों के निर्यात से संबंधित देश-विशिष्ट डेटा को सार्वजनिक करना बंद कर दिया है। बीजिंग वॉशिंगटन के साथ अपनी व्यापार वार्ता में दुर्लभ पृथ्वी आपूर्ति श्रृंखला पर अपने दबदबे का फायदा उठाना चाहता हैभारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली कंपनियां इन शक्तिशाली चुंबकों की सबसे बड़ी खरीदार हैं। ये चुंबक रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस व डिफेंस जैसी हाई टेक्निक इंडस्ट्री के लिए काफी जरूरी हैं











