सरकार के मुताबिक, देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल पर 31 मार्च तक 48,103 करोड़ रुपये का एजीआर बकाया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह रकम ब्याज जुड़ने से और बढ़ गई है। जब सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था, तब दूरसंचार विभाग (DoT) के अनुसार एयरटेल पर 44,000 करोड़ रुपये का बकाया था, जबकि कंपनी का अपना आकलन 13,000 करोड़ रुपये था। एयरटेल अब तक 18,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है, जिसमें 5,000 करोड़ रुपये की एक अंतरिम (ad-hoc) राशि भी शामिल है।
क्या कहा कंपनी ने?
भारती एयरटेल के वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर गोपाल विट्टल ने कहा, 'हमने हमेशा कहा है कि साल 2019 का एजीआर फैसला इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका था। यह और भी निराशाजनक था कि गणना की गलतियों को भी स्वीकार नहीं किया गया।' उन्होंने कहा, 'हमें खुशी है कि कोर्ट ने एजीआर देनदारियों के मिलान की अनुमति दी है। अब हम इसे एक-एक करके आगे बढ़ाएंगे। सबसे पहले, हम सरकार से संपर्क करेंगे और यह काम कंपनी आने वाले दिनों में करेगी। उसके बाद हम आगे की रणनीति तय करेंगे।'साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने एजीआर की व्यापक परिभाषा को बरकरार रखा था, जिसमें टेलीकॉम कंपनियों द्वारा अर्जित सभी तरह की आय शामिल थी, न कि केवल टेलीकॉम से होने वाली आय। इस फैसले के कारण टेलीकॉम कंपनियों पर भारी भरकम बकाया हो गया था।











