मिशेल इंस्टीट्यूट फॉर एयरोस्पेस स्टडीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ताइवान या किसी दूसरे क्षेत्रीय सहयोगी को लेकर अमेरिका और चीन के बीच युद्ध छिड़ता है तो चीन के अंदरूनी इलाकों पर हमला करने के लिए बड़ी बॉम्बर फोर्स की जरूरत है। मौजूदा समय में अमेरिकी मिलिट्री के पास चीनी सीमा के अंदर हमले करने और चीनी आर्मी (पीएलए) को रोकने के लिए कोल्ड वॉर के बाद के लड़ाकू विमानों की ताकत नहीं है।
चीनी आर्मी को नहीं रोक पाएंगे
मिशेल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी एयर फोर्स चीन के अंदर ऑपरेशनल पनाहगाहों से पीएलए को लंबी दूरी के हवाई और मिसाइल हमले करने से रोकने की अपनी क्षमता खो रही है। यह कमी चीन के हमले को रोकने और युद्ध जीतने की यूएस मिलिट्री की क्षमता को कम कर रही है।रिपोर्ट में कहा गया है कि पेंटागन की मौजूदा युद्ध रणनीति पीएलए को ताइवान पर कब्जा करने से रोकने तक सीमित है। हालांकि इससे ज्यादा एक संतुलित युद्ध रणनीति में हवाई हमले शामिल होने चाहिए जो हवा, जमीन और समुद्र में मुख्य भूमि से लंबी दूरी तक हाई-डेंसिटी थ्रेट गढ़ बनाने की चीन की क्षमता को रोके।
मजबूती से हमला ही बेहतर बचाव
रिपोर्ट में कहा गया है, 'एक मजबूत हमला सबसे अच्छा बचाव है। युद्ध जीतने वाले अमेरिकी अभियान में चीन के मिलिट्री लीडरशिप, कमांड कंट्रोल और लंबी दूरी की लड़ाकू ताकतों के खिलाफ स्ट्रेटेजिक हमले शामिल होने चाहिए। यह अब पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सेना की असरदार तरीके से काम करने की क्षमता के लिए खतरा हैं।"अमेरिकी मिलिट्री फोर्स फिलहाल चीनी मिसाइल और एयर फोर्स के लिए अंदरूनी इलाकों में पनाह देने से रोक नहीं कर पा रही हैं क्योंकि दशकों से फोर्स में कटौती हो रही है। इस वजह से एयर फोर्स के लंबी दूरी के स्टेल्थ बॉम्बर्स के फ्लीट कम हो गए हैं। ऐसे में एयर फोर्स को जल्दी ही 200 B-21 बॉम्बर बनाकर फिर से बनाना होगा ताकि चीन को रोका जा सके।











