रूसी विदेश मंत्री ने समझाया कि 'ऐसी संभावना है कि अगर इन S-400 सिस्टम को किसी ऐसे देश में भेजा जाए जो जिम्मेदार हो और रूस के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखता हो तो हम ऐसे देश को S-400 ट्रांसफर करने के लिए तैयार होंगे बशर्ते कोई अनुरोध आए।' तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान ने जवाब में कहा कि S-400 को लेकर 'सभी के साथ' बातचीत जारी है लेकिन उन्होंने कोई समय-सीमा नहीं बताई। फिदान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान तुर्की पत्रकार बहार फेजान से बातचीत में कहा 'जब यह बातचीत पूरी हो जाएगी तो हम इसे जनता के साथ साझा करेंगे।'
क्यों S-400 का सौदा पूरा नहीं कर पा रहा तुर्की?
- तुर्की अमेरिका से एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदना चाहता है लेकिन शर्त ये है कि ऐसा करने के लिए उसे रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को किसी और देश को बेचना होगा।
- रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा कि मॉस्को अपने S-400 सिस्टम को किसी तीसरे देश को ट्रांसफर करने की अनुमति देने पर विचार कर सकता है लेकिन इसके लिए रूस की साफ मंजूरी और इस बात की गारंटी जरूरी होगी कि इस इक्विपमेंट को आगे किसी और को नहीं भेजा जाएगा।
- इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि अंकारा F-35 प्रोग्राम में फिर से शामिल होने के लिए अपने S-400 सिस्टम UAE या कतर को बेच सकता है।
रूस से S-400 खरीदने के बाद 2019 में तुर्की को F-35 प्रोग्राम से हटा दिया गया था। वाशिंगटन का तर्क था कि S-400 का रडार F-35 स्टील्थ फाइटर के सीक्रेट्स की चोरी कर सकता है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से तुर्की को F-35 जेट बेचने का विरोध किया है। जुलाई में CNN से बातचीत में उन्होंने कहा था कि इन जेट्स से इलाके में सैन्य संतुलन बिगड़ जाएगा। इजरायल इस क्षेत्र में अपनी 'क्वालिटेटिव मिलिट्री एज' (QME) यानी गुणात्मक सैन्य बढ़त बनाए रखने पर जोर देता है।
कौन हो सकता है S-400 का नया खरीदार?
Haber7 ने दावा किया कि तुर्की और रूस ट्रांसफर को लेकर एक आम सहमति पर पहुंच गए हैं और इसमें देरी मॉस्को की तरफ से नहीं हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि UAE वाला रास्ता रुकने के बाद अंकारा अब एक दूसरे फॉर्मूले पर काम कर रहा है। रिपोर्ट में किसी दूसरे खरीदार का नाम नहीं बताया गया है। इसीलिए वो देश कौन होगा इसपर सस्पेंस जारी है। कुछ रिपोर्ट्स में मिस्र, सऊदी अरब और यहां तक की पाकिस्तान का भी नाम लिया गया है। हालांकि पाकिस्तान के नाम पर रूस सहमत होगा ऐसा संभव नहीं लग रहा है।क्या रूस S-400 डिफेंस सिस्टम के रीसेल की देगा इजाजत? क्लॉज का कड़ा नियम
- अंतरराष्ट्रीय रक्षा सौदों में 'एंड-यूज़र एग्रीमेंट' का कड़ा नियम लागू होता है जिसके तहत कोई भी देश खरीदे गए हथियार को अपनी मर्जी से किसी तीसरे देश को नहीं बेच सकता।
- S-400 सिस्टम का मूल निर्माता रूस है इसलिए इसे किसी अन्य देश को री-सेल करने के लिए तुर्की को मॉस्को की आधिकारिक और लिखित अनुमति लेनी ही होगी।
- रूस अपनी इस सबसे एडवांस और संवेदनशील एयर डिफेंस तकनीक को आसानी से किसी ऐसे मुल्क में जाने की इजाजत नहीं देगा जहां से इसके खुफिया सीक्रेट्स अमेरिका या नाटो देशों तक पहुंच सकें।
- अगर तुर्की बिना व्लादिमीर पुतिन की हरी झंडी के इसे किसी मक्का पैक्ट पार्टनर या अन्य देश को सौंपता है तो यह समझौते का सीधा उल्लंघन होगा और रूस-तुर्की संबंधों में भारी दरार आ जाएगी।
