एशियन ग्रोथ रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर नजरुल इस्लाम और अमेरिका की कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर खलेकुज्जमां ने प्रोथोमोलो में अपने लेख में यह मुद्दा उठाया है। उन्होंने बताया है कि गंगा बैराज योजना पर दो NGO- बांग्लादेश एनवायरनमेंट नेटवर्क (BEN) और बांग्लादेश परिबेश आंदोलन (BPA) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। इन सवालों पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है क्योंकि इससे लाखों बांग्लादेशी लोगों के जीवन पर फर्क पड़ सकता है।
ग्लादेश में पद्मा (गंगा) नदी के प्रोजेक्ट (गंगा बैराज परियोजना) को दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में सूखे की समस्या से निपटने और जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए बनाने का दावा किया गया है।
NGO ने उठाए सवाल
प्रोफेसर इस्लाम और प्रोफेसर खलेकुज्जमां ने गंगा बैराज को लेकर दोनों NGO की ओर से उठाए गए 10 बिंदुओं का जिक्र किया है। इसमें पूछा गया है कि प्रोजेक्ट पर गोपनीयता गंगा बैराज गंगा जल पर ढाका की बातचीत प्रभावित कर सकती है। इस पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि भारत को फरक्का बैराज से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।इन एनजीओ का कहना है कि बांग्लादेश जल विकास बोर्ड सहित अधिकारियों ने बार-बार अनुरोध करने के बावजूद गंगा बैराज पर व्यवहार्यता अध्ययन साझा नहीं किया है। सरकारी एजेंसियां विदेशी विशेषज्ञों की भागीदारी को एक बड़ी खूबी बताती हैं, जबकि लोगों की राय इसके उलट है। वह इसे कमजोरी की तरह मान रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में स्थित फरक्का बैराज से बिहार और पूरे गंगा बेसिन को नुकसान हो रहा है। इसे बिहार के लिए 'अभिशाप' या विनाशकारी मॉडल तक कहा गया है।
क्या हैं एक्सपर्ट के अंदेशे
दोनों लेखकों ने अपने लेख में कहा है कि बांग्लादेश के जल विकास से जुड़ी त्रासदियों के लिए मुख्य रूप से विदेशी विशेषज्ञ जिम्मेदार थे। स्थानीय इंजीनियरों ने भी चुपचाप उनकी मदद की थी, इसलिए वे भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं। दोनों लेखकों ने ये अहम बातें कही हैं।- वे चीनी इंजीनियरों के मामले का जिक्र करते हैं, जिन्होंने तीस्ता मास्टर प्लान तैयार किया था। इसकी बहुत तारीफ हुई थी लेकिन बाद में कई कमियां सामने आने पर इसे वापस लिया गया। पेश की गई संशोधित योजना पेश में भी गंभीर कमियां पाई गई हैं।
- मास्टर प्लान को लेकर बरती गई गोपनीयता ने जल विशेषज्ञों और NGO समुदाय को उलझन में डाल दिया है। सवाल ये है कि जिस प्रोजेक्ट का असर लाखों लोगों पर पड़ेगा, उसे लेकर इतनी गोपनीयता क्यों बरती जानी चाहिए।
- बांग्लादेश के लोग ऐसे आश्वासनों से गुमराह नहीं होंगे कि प्रस्तावित गंगा बैराज केवल सर्दियों में इस्तेमाल के लिए मॉनसून का पानी जमा करेगा। उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इससे भारत के फरक्का जैसे खराब नतीजे ना मिलें।
