सेना को सबसे बड़ा झटका
बताया जा रहा है कि तीन नवंबर को मियांवाली एयरबेस पर हुए हमले में पाकिस्तान की वायुसेना के 14 एयरक्राफ्ट नष्ट हो गए तो वहीं 35 जवानों की मौत हो गई। लंदन के किंग्स कॉलेज में वॉर स्टडी डिपार्टमेंट के साथ बतौर सीनियर फेलो तैनात आयशा सिद्दीका के मुताबिक पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां इस गलतफहमी में थीं कि उन्हें आतंकवाद से निजात मिल गई है। लेकिन मियांवाली में हुआ हमला उनकी आंखें खोलने वाला था। एमएम आलम एयर बेस पर हुए हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने वेबसाइट द प्रिंट में लिखे अपने आर्टिकल में कहा है कि आतंकियों ने इस हमले के जरिए पाकिस्तान की वायु सेना के एक ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर सबसे कठिन लक्ष्य पर कब्जा करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने की कोशिश की थी।
बताया जा रहा है कि तीन नवंबर को मियांवाली एयरबेस पर हुए हमले में पाकिस्तान की वायुसेना के 14 एयरक्राफ्ट नष्ट हो गए तो वहीं 35 जवानों की मौत हो गई। लंदन के किंग्स कॉलेज में वॉर स्टडी डिपार्टमेंट के साथ बतौर सीनियर फेलो तैनात आयशा सिद्दीका के मुताबिक पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां इस गलतफहमी में थीं कि उन्हें आतंकवाद से निजात मिल गई है। लेकिन मियांवाली में हुआ हमला उनकी आंखें खोलने वाला था। एमएम आलम एयर बेस पर हुए हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने वेबसाइट द प्रिंट में लिखे अपने आर्टिकल में कहा है कि आतंकियों ने इस हमले के जरिए पाकिस्तान की वायु सेना के एक ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर सबसे कठिन लक्ष्य पर कब्जा करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने की कोशिश की थी।
टीटीपी से जुड़े संगठन ने दिया अंजाम
इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े संगठन तहरीक-ए-जेहाद पाकिस्तान (टीजेपी) ने ली है। टीटीपी और उसके कई गुटों ने पाकिस्तान में आसान और मुश्किल दोनों ही तरह के लक्ष्यों को निशाना बनाया है। साल 2009 में सेना जनरल मुख्यालय (जीएचक्यू), साल 2011 में मेहरान नौसैनिक एयरबेस, 2012 में मिन्हास एयरबेस और 2015 में बडाबेर नॉन-फ्लाइंग एयरबेस शामिल हैं। ताजा हमला यह बताने के लिए काफी है कि आतंकवाद की समस्या अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। आतंकी तत्व हमले के बाद फिर से पहले वाली स्थिति में आ गए हैं।
देश के सुरक्षा विशेषज्ञों को चिंता सता रही है कि मियांवाली हमला, पंजाब में आतंकवाद के दूसरे दौर की शुरुआत हो सकता है। उनकी मानें तो इस हमले के बाद सेना को नींद से जागने की जरूरत है। देश की मिलिट्री को हिंसा संवेदनशीलता को सामने लाना होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह हमला पाकिस्तान के लिए विभाजन की एक और वजह बन सकता है।
इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े संगठन तहरीक-ए-जेहाद पाकिस्तान (टीजेपी) ने ली है। टीटीपी और उसके कई गुटों ने पाकिस्तान में आसान और मुश्किल दोनों ही तरह के लक्ष्यों को निशाना बनाया है। साल 2009 में सेना जनरल मुख्यालय (जीएचक्यू), साल 2011 में मेहरान नौसैनिक एयरबेस, 2012 में मिन्हास एयरबेस और 2015 में बडाबेर नॉन-फ्लाइंग एयरबेस शामिल हैं। ताजा हमला यह बताने के लिए काफी है कि आतंकवाद की समस्या अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। आतंकी तत्व हमले के बाद फिर से पहले वाली स्थिति में आ गए हैं।
देश के सुरक्षा विशेषज्ञों को चिंता सता रही है कि मियांवाली हमला, पंजाब में आतंकवाद के दूसरे दौर की शुरुआत हो सकता है। उनकी मानें तो इस हमले के बाद सेना को नींद से जागने की जरूरत है। देश की मिलिट्री को हिंसा संवेदनशीलता को सामने लाना होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह हमला पाकिस्तान के लिए विभाजन की एक और वजह बन सकता है।
सेना का दावा गलत साबित
पाकिस्तान की सेना ने आतंकियों के खिलाफ कई बड़े आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किए थे। साल 2017 में ऐसा ही एक अभियान रद्द-उल-फसाद लॉन्च किया गया था। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि उसने देश से आतंकवाद को मिटा दिया है। कुछ लोग इस दावे से सहमत नहीं थे। कभी भी इस बात की कल्पना नहीं की गई थी कि आतंकी हमला करेंगे और वह भी पीएएलफ के बेस को निशाना बनाने में कामयाब रहेंगे। पंजाब में मियांवाली वह जगह है जिसे आमतौर पर सबसे सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है।











