अतीक अहमद और अशरफ को यूपी विधानसभा में दी गई श्रद्धाजंलि, प्रयागराज में हुआ था मर्डर

अतीक अहमद और अशरफ को यूपी विधानसभा में दी गई श्रद्धाजंलि, प्रयागराज में हुआ था मर्डर
लखनऊ: उत्‍तर प्रदेश विधानसभा मॉनसून सत्र के पहले दिन की कार्यवाही हंगामे के बीच शुरू हुई। जैसे ही विधानसभा अध्‍यक्ष सतीश महाना अपनी कुर्सी पर बैठे, सपा विधायकों ने पोस्‍टर और बैनर लहराने शुरू कर दिए। इस पर सतीश महाना ने कहा कि वह सदन स्‍थगित नहीं करेंगे। उन्‍होंने यह भी कहा कि यहां पर दूसरे राज्‍यों की चर्चा नहीं जाएगी। इसके बाद सदन की कार्यवाही शुरू हुई। सदन ने पूर्व विधायकों अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ को श्रद्धाजंलि दी गई। खास बात यह रही कि दोनों का नाम सबसे अंतिम में लिया गया। इस साल अप्रैल में उनकी प्रयागराज में गोलियां बरसाकर हत्‍या कर दी गई थी। फरवरी में हुए उमेश पाल मर्डर के सिलसिले में पूछताछ करने के लिए अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से प्रयागराज ले आया गया था। वहीं, अशरफ को भी बांदा जेल से लाया गया था। प्रयागराज के कॉल्विन अस्‍पताल में मेडिकल कराने ले जाते समय तीन युवकों ने गोली मार दोनों की हत्‍या कर दी थी। विधानसभा में अतीक अहमद और अशरफ के अलावा अन्‍य माननीयों को भी श्रद्धाजंलि दी गई। सदन ने पूर्व विधायक सत्तार अंसारी, अमर सिंह, प्रेम प्रकाश सिंह, रणधीर सिंह, सुजान सिंह बुंदेला, शारदा प्रताप शुक्ला, हरिशंकर तिवारी, हरद्वार दुबे, अवनीश कुमार सिंह, हरिद्वार दुबे, अबरार अहमद और खालिद अजीम अशरफ को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धाजंलि देने के बाद सदन की कार्यवाही शुरू हुई। सपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने मणिपुर में हुई हिंसा को लेकर चर्चा कराने की मांग की। इसको लेकर हंगामा शुरू हो गया। स्‍पीकर ने कहा कि दूसरे राज्‍यों के मुद्दों को लेकर यहां चर्चा नहीं होगी।

हमलावरों ने बड़ा अपराधी बनने के लिए की थी अतीक की हत्‍या!

गौरतलब है कि इस साल 15 अप्रैल को प्रयागराज में अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की हत्‍या के बाद हड़कंप मच गया था। तीनों हमलावरों ने घटना को अंजाम देने के बाद मौके पर ही सरेंडर कर दिया था। तीनों इस समय सुरक्षा के मद्देनजर प्रतापगढ़ जेल में बंद हैं। इस मामले की जांच के लिए एक न्‍यायिक कमेटी बनी है जो छानबीन कर रही है। पूछताछ में तीनों हमलावरों लवलेश तिवारी, सनी और अरुण मौर्य ने बताया था कि उनकी अतीक अहमद से कोई निजी दुश्‍मनी नहीं थी। वे तीनों बड़ा अपराधी बनना चाहते थे। उन्‍होंने सोचा था कि अतीक और अशरफ की हत्‍या कर वे अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे।

Advertisement