‘आसमान में बरसने नहीं गरजने वाले बादल’, सूख रही धान की फसल और खेतों में पड़ी दरारें

‘आसमान में बरसने नहीं गरजने वाले बादल’, सूख रही धान की फसल और खेतों में पड़ी दरारें
गोपालगंजः पूरे बिहार में भीषण गर्मी पड़ रही है। सूखे के अभाव में अब खेतों में खड़ी फसले भी सूखने लगी है। उत्तर बिहार में भी सूखे के हालात हैं। गोपालगंज में बारिश नहीं होने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं। गोपालगंज में महज कुछ फ़ीसदी ही धान की रोपनी हुई है। लेकिन यह फसल भी पानी के अभाव में खेतों में पीली पड़ने लगी है। खेतों में खड़ी धान की फसलें सूख रही है। खेतों में पड़ती दरारें किसानों के चेहरे पर पड़ी झुर्रियों से ज्यादा गहरी नहीं है। लेकिन खेतों में दरारें अब ज्यादा चौड़ी होने लगी है।

​किसानों की उम्मीद भी टूटने लगी

किसान रोज आसमान की तरफ टकटकी लगाए इस उम्मीद में बैठे हैं कि शायद आज भी बारिश हो जाए तो उनकी यह फसल बच जाए। रोज एक एक दिन बारिश के बिना बीत रहे है। वैसे वैसे किसानों की उम्मीद भी टूटने लगी है।

​धान की रोपनी के बाद अब खेत सूखने लगे​

गोपालगंज शहर से महज कुछ दूरी पर है बहोरा टोला। इस गांव के 72 वर्षीय किसान मोहम्मद कासिम ने बताया कि उन्होंने इस साल भी 9 कट्ठे में धान की खेती की है। वह मजदूरी करते हैं और जो पैसा उन्हें मजदूरी में मिलता है। उस पैसे को उन्होंने खेती में लगा दी। बारिश अच्छी हुई थी। उन्होंने रोपनी भी कर लिया है। लेकिन अब बारिश के अभाव में खेतो में दरारें पड़ने लगी है। नमी कम होने से खेत सूखने लगे है।

​किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए

बुजुर्ग मोहम्मद कासिम जैसे सैकड़ों किसान रोज अपने खेतों में बैठकर आसमान की ओर टकटकी लगाए देखते हैं। शायद अब भी बारिश हो जाए तो उनके खेतों में खड़ी फसलें लहलहा उठे। मोहम्मद कासिम की तरह गोपालगंज के सैकड़ो किसानों ने भी खेती की है। उन्हें भी उम्मीद है की समय पर बारिश हो जायगी तो उनकी फसल बच जाएगी।

​पिछले साल भी किसानों को हुआ था नुकसान

पिछले साल भी मौसम की मार से किसान बेजार हो गए थे। इस बार भी पानी के अभाव में किसानों की फसल बर्बाद होने का संकट गहरा रहा है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में झमाझम बारिश होने की पूर्वानुमान जरूर किया है। लेकिन अब यह देखना होगा की यह पूर्वानुमान कितना सटीक साबित होता है।

किसान रोज आसमान की तरफ टकटकी लगाए इस उम्मीद में बैठे हैं कि शायद आज भी बारिश हो जाए तो उनकी यह फसल बच जाए। रोज एक एक दिन बारिश के बिना बीत रहे है। वैसे वैसे किसानों की उम्मीद भी टूटने लगी है।

​धान की रोपनी के बाद अब खेत सूखने लगे​

​किसानों की उम्मीद भी टूटने लगी


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