अगस्त 2023 में मार्केट रेगुलेटर सेबी ने एमएमटीसी का स्टॉकब्रोकर लाइसेंस खत्म कर दिया था। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेज के साथ अवैध पेयर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के कारण ऐसा किया गया था। सेबी का कहना था कि एमएमटीसी ने जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल के बिना पेयर्स कॉन्ट्रैक्ट्स किए थे। एमएमटीसी के भविष्य के बारे में ऑल्टरनेटिव मैकेनिज्म आज कोई फैसला करेगी। इसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रोड मिनिस्टर नितिन गडकरी और कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल शामिल है। एमएमटीसी कॉमर्स मिनिस्ट्री के तहत काम करती है। अभी इसमें सरकार की 99.33 फीसदी हिस्सेदारी है।
क्या करती हैं ये कंपनियां
पहले एमएमटीसी हाई ग्रेड आयरन, मैगनीज, क्रोम अयस्क, कोपरा और दूसरे वैल्यूएबल मेटल्स के आयात-निर्यात के लिए मध्यस्थ एजेंसी के रूप में काम करती थी। एक समय यह देश की सबसे बड़ी नॉन-ऑयल इम्पोर्टर थी। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में इसका प्रॉफिट 1076.07 करोड़ रुपये था जबकि 2021-22 में कंपनी को 241.93 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। माना जा रहा है कि बैठक में एसटीसी और पीईसी के बारे में भी चर्चा हो सकती है। एसटीसी में सरकार की 90 परसेंट हिस्सेदारी है जबकि पीईसी पूरी तरह सरकारी कंपनी है।एसटीसी खाद्य तेल, दलहन, चीन और गेहूं जैसी जरूरी चीजों के आयात में अहम भूमिका निभाती है जबकि पीईसी मशीनरी और रेलवे इक्विपमेंट्स के आयात-निर्यात के लिए मध्यस्थ एजेंसी की भूमिका निभाती है। ये तीनों कंपनियां कॉमर्स मिनिस्ट्री के अंडर आती हैं। एमएमटीसी की स्थापना 1963 में हुई थी। इसी तरह एसटीसी को 1956 में स्थापित किया गया था। पीईसी को 1971-72 में एसटीसी से अलग किया गया था। पिछले सत्र में एमएमटीसी का शेयर 10 परसेंट की गिरावट के साथ 63.50 रुपये पर बंद हुआ था। इसी तरह एसटीसी का शेयर भी 4.33 परसेंट की गिरावट के साथ 129.30 रुपये पर बंद हुआ था।











