टीसीएस को ऐसा शेयर माना जाता था जिसे पांच साल में निवेशकों का पैसा दोगुना कर देता था। लेकिन अब यह 2008 की आर्थिक मंदी के बाद सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। तब इसके शेयर 55% तक गिर गए थे। ट्रेंट ने पिछले पांच साल में 800% का रिटर्न दिया था लेकिन यह शेयर भी 2008 के बाद सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। टीसीएस में गिरावट की वजह कंपनी से जुड़ी नहीं है। यह पूरे आईटी सेक्टर की समस्या है। अमेरिका में क्लाइंट कम खर्च कर रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से भी दबाव है।
टीसीएस का शेयर क्यों गिर रहा?
हाल ही में टीसीएस ने लगभग 2% कर्मचारियों (लगभग 12,000 लोगों) को नौकरी से निकालने का ऐलान किया था। हाल ही में आए पहली तिमाही के नतीजों से पता चला कि टीसीएस की कमाई उम्मीद से कम रही। इस दौरान कंपनी को $9.4 अरब के नए प्रोजेक्ट मिले जो पिछले साल से 13% ज़्यादा है। लेकिन इसमें कोई बड़ा प्रोजेक्ट शामिल नहीं है। टीसीएस के मैनेजमेंट का कहना है कि ग्राहक सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं और नए प्रोजेक्ट शुरू करने में देरी हो रही है।एलारा ने टीसीएस को डाउनग्रेड कर दिया। नोमुरा ने FY26–28 के लिए EPS अनुमान को 1–2% तक घटा दिया है। उनका कहना है कि कंपनी की कमाई और मुनाफे पर दबाव है। उसने टीसीएस के शेयर का टारगेट प्राइस 3,820 रुपये से घटाकर 3,780 रुपये कर दिया है। हालांकि, जेएम फाइनेंशियल ने उम्मीद जताई है कि आर्थिक स्थिति सुधरने के बाद टीसीएस की ग्रोथ बढ़ेगी। टीसीएस मैनेजमेंट ने कहा है कि FY26 में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमाई FY25 से ज्यादा होगी। अगर हालात ठीक रहे तो दूसरी तिमाही पहले से बेहतर हो सकती है।











