दो अक्टूबर से उद्योगों के लिए श्रम स्टार रेटिंग होगी:श्रम विभाग ने सुझाव मांगे

दो अक्टूबर से उद्योगों के लिए श्रम स्टार रेटिंग होगी:श्रम विभाग ने सुझाव मांगे

प्रदेश में उद्योग तथा व्यवसायों के लिए श्रम स्टार रेटिंग योजना 2 अक्टूबर से शुरू होगी। इस योजना में तय की जाने वाली रेटिंग किस तरह की जाए, इसको लेकर उद्योगपतियों, व्यवसायियों और कारोबारियों के सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद फाइनल स्कीम पर सरकार की स्वीकृति लेकर उद्योगों को प्रोत्साहित करने का काम किया जाएगा। योजना में उद्योगों की अलग-अलग कैटेगरी के आधार पर सरकार की ओर से वेटेज दिए जाने पर भी फैसला किया जाएगा।

श्रम कानून एवं औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के पालन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार ने इस पर काम शुरू किया है। श्रम स्टार रेटिंग को लेकर श्रम विभाग के सचिव ने उद्योग तथा व्यवसायों के प्रतिष्ठित संगठनों तथा प्रबंधकों से एक दौर की चर्चा भी की है। श्रम विभाग के सचिव राजेंद्रन ने कहा है कि इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का भी काम होगा और योजना 2 अक्टूबर को लागू होगी। उन्होंने जिलों में होने वाले युवा संगम, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) तथा दुर्घटना रहित दिवस संबंधी योजनाओं की जानकारी देते हुए इनसे जुड़ने का आग्रह उद्योगपतियों से किया।

इस तरह के सुझाव दिए उद्यमियों ने

  • सेल्फ असेसमेंट की प्रणाली में स्वप्रबंधन को प्रस्तावित वेटेज अधिक दिखता है, यह प्रणाली अधिक युक्तियुक्त होना चाहिए।
  • उद्योगों में महिला सहभागिता के संबंध में उद्योगवार अलग-अलग मापदण्ड होना चाहिए। कई उद्योगों में महिलाएं अधिक और कहीं बहुत कम हैं, इसलिए इसके अनुरूप वेटेज होना चाहिए।
  • दिव्यांग श्रमिकों की नियुक्ति पर भी वेटेज हो।
  • रेटिंग के घटक उद्योगों की श्रेणी वृहद, मध्यम, लघु, सूक्ष्म, खतरनाक और गैर खतरनाक के आधार पर तय की जाए।
  • उद्योगों में श्रमिक संख्या तथा प्रोडक्ट्स की प्रकृति के अनुसार कैटेगरी तय होना चाहिए। वेटेज भी उद्योग, व्यवसाय के अनुसार हो।

ऐसे भी सुझाव मिले

  • लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों के लिए श्रम स्टार यह अनिवार्य नहीं होना चाहिए।
  • स्वतंत्र इम्पेनल्ड एजेंसियों का चयन उद्योगों तथा विभाग की सहमति से तय किया जाना उचित होगा।
  • उच्च रेटिंग के आधार पर शासकीय क्रय में प्राथमिकता तथा शासन से सब्सिडी और अन्य इन्सेंटिव मिलना चाहिए।
  • श्रम कानूनों के किन प्रावधानों को सम्मिलित किया जायेगा, यह स्पष्ट होना चाहिए।
  • रेटिंग जारी होने के बाद प्रभावशील होने की समय-सीमा नियत हो और रेटिंग कितनी समय अवधि में होगी इसकी फ्रीक्वेंसी तय हो।

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