प्राधिकरण का गठन और शक्तियां
प्राधिकरण के अध्यक्ष मुख्यमंत्री रहेंगे। मेट्रोपालिटन क्षेत्र घोषित होने के बाद अब मैदानी स्तर पर कार्य संचालित किया जाना है। इसके लिए प्राधिकरण का गठन होना बाकी है। इसकी शक्तियां और दायित्व संबंधी नियम को अंतिम रूप दिया जाना है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने अधिनियम के अनुरूप प्रारूप तैयार किया है। इसमें क्षेत्र के भीतर सभी शक्तियां प्राधिकरण को दी गई हैं। इन क्षेत्रों में नगरीय और पंचायतराज संस्थाएं भी हैं, जो विभिन्न कानूनों के अनुसार काम करती हैं। उनके अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं।
नियम-प्रक्रियाओं का सरलीकरण भी किया जा रहा है ताकि किसी योजना के लिए अनुमति आदि में समय न लगे। कालोनी और उद्योगों से जुड़ी विभिन्न अनुमतियां देने का अधिकार प्राधिकरण के पास रहेगा। इसका लाभ यह होगा कि एक ही जगह से सभी अनुमतियां मिल जाएंगी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि आगामी कैबिनेट की बैठक में प्राधिकरण से जुड़े नियम का प्रस्ताव अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है।
भोपाल मेट्रोपालिटन में 13 हजार वर्ग किमी क्षेत्र
भोपाल मेट्रोपालिटन के लिए 13 हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र अधिसूचित किया गया है। इसमें भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम के नगरीय निकायों के साथ 2,510 गांव शामिल हैं।
इंदौर मेट्रोपालिटन में 16 हजार वर्ग किमी क्षेत्र
इंदौर मेट्रोपालिटन क्षेत्र के लिए 16,087 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र अधिसूचित किया गया है। इसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम जिलों के नगरीय निकायों के साथ 2,781 गांव शामिल हैं।
15 वर्ष की विकास एवं निवेश योजना बनेगी
मेट्रोपालिटन क्षेत्र के लिए 15 वर्ष की आवश्यकता और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए विकास एवं निवेश की योजना बनाई जाएगी। इसमें अधोसंरचना विकास, औद्योगिक विकास, वन क्षेत्रों का पुनर्जीवन, मिट्टी क्षरण रोकथाम, आवास एवं सामुदायिक सुविधाओं का विस्तार, प्राकृतिक सौंदर्य संरक्षण, पुरातात्विक महत्व वाले स्थलों का संवर्धन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना शामिल है।
मेट्रोपालिटन आयुक्त को मिलेंगी नगर एवं ग्राम निवेश संचालक की शक्तियां
अधिनियम में यह प्रविधान किया गया है कि प्राधिकरण नगर विकास योजनाओं के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी स्वयं ले सकेगा या किसी निकाय को अधिकृत कर सकेगा। मेट्रोपालिटन आयुक्त को नगर एवं ग्राम निवेश संचालक की शक्तियां दी जाएंगी। यानी जिस काम के लिए अभी नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय जाना पड़ता है वे अब आयुक्त के पास से होंगे।











