चुनावी मौसम में लगेगा महंगाई का झटका! रूस की 'दोस्ती' भारत को पड़ सकती है भारी

चुनावी मौसम में लगेगा महंगाई का झटका! रूस की 'दोस्ती' भारत को पड़ सकती है भारी
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में अगले कुछ दिनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके बाद अगले साल देश में आम चुनाव होंगे। चुनावी मौसम में महंगाई को रोकने के लिए सरकार हरसंभव उपाय कर रही है। इनमें गेहूं, गैर-बासमती चावल और चीनी के निर्यात पर रोक शामिल है। लेकिन कच्चे तेल की कीमत में हाल में आई तेजी सरकार के लिए जी का जंजाल बन सकती है। इजरायल और हमास के बीच चल रही जंग के कारण कच्चा तेल 93 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। इस बीच रूस से मिल रहे सस्ते कच्चे तेल पर भी तलवार लटक रही है। रूस ने चीन की करेंसी में पेमेंट की मांग की है लेकिन भारत सरकार ने इसे मानने से इन्कार कर दिया है। इस समय भारत के लिए रूस तेल का सबसे बड़ा सप्लायर है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि रूस के कुछ ऑयल सप्लायर युआन में पेमेंट मांग रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है। देश में 70 परसेंट रिफाइनरी कंपनियां सरकारी हैं। यानी उन्हें पेमेंट के मामले में फाइनेंस मिनिस्ट्री के ऑर्डर को मानना होगा। सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने पहले युआन में भुगतान किया था लेकिन सरकार ने इसे रोक दिया है। संभव है कि निजी रिफाइनिंग कंपनियों ने भी युआन में पेमेंट किया हो लेकिन इस बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।

रूस की समस्या

रूस का कहना है कि उसके पास रुपये की जरूरत से ज्यादा सप्लाई है और इसे खपाने में उसके संघर्ष करना पड़ रहा है। पिछले एक साल में उसके लिए युआन की अहमियत बढ़ गई है क्योंकि उसे चीन से भारी आयात करना पड़ रहा है। रूस की कंपनियां युआन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं। यही वजह है कि इस साल रूस में युआन सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाली करेंसी बन गई है। भारत की रिफाइनरी कंपनियां ज्यादातर यूएई की करेंसी दिरहम, डॉलर और रुपये में पेमेंट करती हैं। छोटे-मोटे लेनदेन के लिए युआन का इस्तेमाल होता है। हाल के दिनों में रूस और चीन के बीच प्रगाढ़ता बढ़ी है।

यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। इसमें रूसी तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल का प्रतिबंध भी शामिल है। भारत को रूस से सस्ती कीमत पर कच्चा तेल मिल रहा है लेकिन पेमेंट की दिक्कतों के कारण इसमें मुश्किल हो सकती है। एक अधिकारी ने बताया की चार-पांच कार्गो के पेमेंट में देरी हुई है क्योंकि दोनों पक्षों के बीच करेंसी एक्सचेंज पर सहमति नहीं बन पाई थी। भारत अभी सबसे ज्यादा कच्चा तेल रूस से ही आयात कर रहा है। लेकिन पेमेंट की दिक्कत बढ़ने से यह सौदा मुश्किल में पड़ सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमत

भारत में पिछले साल मई से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस दौरान कच्चे तेल की कीमत में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। बीच में रूस से मिल रही छूट भी काफी कम रह गई थी। इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर भी असर हुआ है। लेकिन चुनावी मौसम में पेट्रोल-डीजल की कीमत में बदलाव की संभावना नहीं है। इसकी वजह यह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने से महंगाई और भड़क सकती है। दिल्ली में पेट्रोल 96.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 89.62 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है।

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