सीएम डॉ. यादव ने कहा कि आज दुनिया भारत के भरोसे है। इसलिए भारत को स्वदेशी की मूल ताकत को पहचानना चाहिए और स्वावलंबन की मशाल को जलाए रखना चाहिए। इस मौके पर उन्होंने लंका विजय के बाद भगवान श्री राम और श्री लक्ष्मण के बीच हुए संवाद का भी जिक्र किया।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हम स्वदेशी को कैसे भूल सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वदेशी अभियान के ब्रांड एंबेसडर हैं। आजादी के आंदोलन की नींव स्वदेशी के मूल मंत्र के बलबूते ही रखी गई। आजादी के पहले महात्मा गांधी ने चरखे से सूत काटते हुए विदेशी वस्त्रों की होली जलवाई और पूरे देश में स्वदेशी और आजादी का बिगुल फूंका था।
हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि आज पंडित दीन दयाल उपाध्याय 109वीं जयंती भी है। पंडित उपाध्याय जनसंघ के संस्थापक तो थे ही, साथ ही एकात्म मानववाद के प्रणेता भी थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महात्मा गांधी और पंडित उपाध्याय में समानता है।
दोनों के विचार, दोनों के भाव हमारी माटी, हमारा देश, देश की आजादी, स्वावलंबन, और स्वदेशी व्यवस्था से जुड़े थे। दोनों इस बात का अनुसरण करते थे कि हमारा देश जब दुनिया के आगे आर्थिक रूप से समृद्ध होगा तब स्वदेशी के बीज से आत्मनिर्भरता का वृक्ष उगेगा।
अपनी मिट्टी से प्रेम करना सीखें
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने कहा कि ताकत भले ही हिरण्यकश्यप में थी, लेकिन संकल्प शक्ति से प्रह्लाद हर मुश्किल से निकले। स्वदेशी अभियान के लिए भी इसी संकल्प शक्ति की आवश्यकता है। स्वदेशी की ताकत पर ही हमारी संस्कृति दुनिया के सामने हजारों साल से टिकी हुई है। इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने शेर की लाइन कही, 'कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी..।
'हमने हर युग में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की ताकत पर दुनिया को हराया है। उन्होंने कहा कि लंका जीतने के बाद श्री लक्ष्मण ने भगवान श्री राम से कहा कि इस देश की भव्यता, सुंदरता और सोने का हमें उपयोग करना चाहिए, तब श्री राम ने कहा था, 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।' हमारी जन्मभूमि के आगे किसी की तुलना नहीं कर सकते। हम अपनी मिट्टी से प्रेम करना सीखें।











