फ्यूल के लिए तरस रही दुनिया और भारत में रेकॉर्ड पर पहुंची सप्लाई, कहां से आ रहा इतना तेल?

फ्यूल के लिए तरस रही दुनिया और भारत में रेकॉर्ड पर पहुंची सप्लाई, कहां से आ रहा इतना तेल?
नई दिल्ली: अमेरिका में फ्यूल की कीमत रेकॉर्ड पर पहुंच गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप को अपना रिजर्व जारी करने को कहा है। इस बीच चीन ने भी फ्यूल के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी है। इससे कच्चा तेल एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इस बीच भारत में सितंबर में कच्चे तेल का आयात इस साल के टॉप पर पहुंच गया। खाड़ी देशों से सप्लाई में अचानक बढ़ोतरी के कारण बीते महीने भारत का क्रूड इंपोर्ट 5.26 मिलियन बैरल प्रति दिन के सालाना उच्च स्तर पर पहुंच गया।

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी में अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार इराक, रूस के बाद दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल की मात्रा में भारी बढ़ोतरी खाड़ी देशों के उत्पादकों और व्यापारियों द्वारा अपनाए गए एक वैकल्पिक तरीके से संभव हुई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस जलमार्ग पर ईरान का नियंत्रण कमजोर हो रहा है।

कैसे होती है सप्लाई?

अब दर्जनों बड़े क्रूड कैरियर अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपोंडर को बंद करके होर्मुज से गुजरते हैं और फिर UAE और ओमान के समुद्री क्षेत्र में शिप-टू-शिप (STS) ऑपरेशन के जरिए अपना कार्गो ट्रांसफर करते हैं। इसके बाद दूसरे जहाज कच्चे तेल को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, जबकि मूल कैरियर अगले फेरे के लिए खाड़ी देशों के टर्मिनल पर लौट आते हैं।

खाड़ी देशों से सप्लाई बहाल होने से भारतीय रिफाइनरों को राहत मिली है। खाड़ी देशों से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में ग्राहम बिल पारित हुआ है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर है। सितंबर में वहां से रोजाना 18.72 लाख बैरल की सप्लाई आई।

सबसे बड़ा सप्लायर

Kpler के अनुसार, सितंबर में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में सऊदी अरब, इराक, UAE, कुवैत, ओमान और कतर की हिस्सेदारी 39% थी। इराक ने रोजाना 5,25,000 बैरल की सप्लाई की। इसके बाद सऊदी अरब ने 5,17,000 बैरल और UAE ने 4,38,000 बैरल की सप्लाई की। सबसे बड़ी हैरानी कुवैत की तरफ से हुई, जिसने 3,35,000 बैरल सप्लाई की जो एक साल में उसकी सबसे ज्यादा सप्लाई थी।
28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद कई महीनों तक भारत के इंपोर्ट में इराक और कुवैत से सप्लाई लगभग बंद हो गई थी। सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर सितंबर में हूती विद्रोहियों ने हमला किया था। इस कारण उससे सप्लाई बंद हो गई थी। अब उसने भी फिर से काम करना शुरू कर दिया है और लाल सागर के यानबू पोर्ट पर कच्चे तेल की लोडिंग शुरू हो गई है।
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