भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में 19.48 करोड़ रुपये के एफडी घोटाले मामले में अब तक मुख्य आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। इस मामले में तत्कालीन कुलपति प्रो. सुनील कुमार की याचिका पर जिला न्यायालय में सुनवाई हुई। इस मामले में तीन मार्च को एफआइआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद तत्कालीन कुलपति प्रो. सुनील कुमार की तलाश में एसआइटी की तीन टीमें जुटी थीं।
वहीं तत्कालीन कुलपति प्रो. सुनील कुमार की ओर से उनके अधिवक्ता ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत का आवेदन प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखा, जिस पर सरकारी अधिवक्ता ने आपत्ति जताई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश संकर्षण प्रसाद पाण्डेय ने बुधवार के लिए फैसला सुरक्षित कर लिया है।
इधर, आरजीपीवी के सरकारी खाते से 19.48 करोड़ रुपये निजी अकाउंट में ट्रांसफर किए जाने के मामले की जांच भोपाल पुलिस ने तेज कर दी है। मामले में गिरफ्तारी से बचने के तत्कालीन कुलपति प्रो. सुनील कुमार, तत्कालीन रजिस्ट्रार आरएस राजपूत सहित तीन आरोपित लापता हो गए हैं। इस मामले की जांच में पारदर्शिता लाने के लिए एबीवीपी ने तीन दिन तक धरना-प्रदर्शन किया था।
मामले में कुमार मयंक की हो सकी है गिरफ्तारी
विवि के तत्कालीन कुलपति डा. सुनील कुमार ने सोमवार को भोपाल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। सुनवाई बुधवार को होगी। भोपाल की गांधी नगर पुलिस ने तत्कालीन कुलपति सुनील कुमार, तत्कालीन रजिस्ट्रार आरएस राजपूत, रिटायर फाइनेंस कंट्रोलर ऋषिकेश वर्मा और आरबीएल बैंक के कर्मचारी कुमार मयंक के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, लेकिन सिर्फ एक की गिरफ्तारी हो सकी है। 22 मार्च को कुमार मयंक की गिरफ्तारी हुई थी। इससे पहले भोपाल जिला न्यायालय में तत्कालीन रजिस्ट्रार आरएस राजपूत ने जमानत याचिका लगाई थी, उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।











