अधिकारी ने कहा, 'हम निर्यातकों से बात कर रहे हैं। हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि हम उन्हें कैसे बेहतर तरीके से मदद कर सकते हैं। हम कारोबार करने को आसान बनाने जैसे तरीकों पर ध्यान दे रहे हैं। हम घरेलू खपत को बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार कर रहे हैं। हम नई सप्लाई चेन और नए बाजारों की तलाश कर रहे हैं।'
क्या शामिल होगा प्लान में?
इस योजना में कई चीजें शामिल हो सकती हैं। जैसे कि MSME और ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए आसान लोन योजनाएं। विदेशों में वेयरहाउसिंग की सुविधा और वैश्विक ब्रांडिंग पहल भी इसमें शामिल हो सकती हैं। इससे निर्यात के नए अवसर मिलेंगे। सरकार ने 1 फरवरी को 2250 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ इस योजना की घोषणा की थी। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 30 अप्रैल को निर्यात संवर्धन परिषदों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों को इस योजना के बारे में जानकारी दी थी।उद्योग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना को दो भागों में बांटा गया है। पहला भाग व्यापार वित्त सहायता (NIRYAT PROTSAHAN) और दूसरा भाग अंतर्राष्ट्रीय समग्र बाजार पहुंच (NIRYAT DISHA) है।











