बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-पाक के हालिया संघर्ष से चीन के रक्षा उद्योग को अप्रत्याशित रूप से लाभ हुआ है। इसकी वजह ये है कि पाकिस्तान ने इस लड़ाई में चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया है। इससे चीन के हथियार उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है। खासतौर से चीनी लड़ाकू विमानों के लिए इस संघर्ष को फायदे का सौदा कहा जा रहा है।
हवाई लड़ाई में दिखाई ताकत
भारत और पाकिस्तान की ओर से चार दिन के संघर्ष में ड्रोन, मिसाइल और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। भारत ने फ्रांस और रूस में बने विमानों का इस्तेमाल किया। वहीं पाकिस्तान ने चीन से मिले J-10 और J-17 विमानों को मैदान में उतारा। हालांकि दोनों देशों ने ये कहा है कि उनके विमानों ने सीमा पार नहीं की बल्कि अपने हवाई क्षेत्र से ही मिसाइलें दागीं।भारत-पाक संघर्ष को कुछ रक्षा विशेषज्ञों ने चीनी हथियार उद्योग के लिए 'डीपसीक मोमेंट' कहा है। बीजिंग के विश्लेषक झोउ बो ने बीबीसी से कहा कि हवाई लड़ाई चीनी हथियार उद्योग के लिए एक बड़ा विज्ञापन थी। अभी तक चीन को अपने हथियारों को युद्ध में आजमाने का मौका नहीं मिला था। इस लड़ाई में शामिल ना होकर भी जरिए चीन ने अपनी ताकत दिखाई है।











