ईरान-इजरायल युद्ध की तपिश भारतीय बासमती चावल तक पहुंची, समंदर में ही अटके लाखों टन का कंशाइनमेंट
नई दिल्ली: ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से पश्चिम एशियाई देश पूरी तरह से झुलस रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के बंद होने से खाड़ी के अधिकतर देशों में पानी के जहाजों का आवागमन अवरूद्ध हो गया है। इस वजह से भारत समेत दुनिया के अधिकतर देशों में क्रूड ऑयल (Crude Oil) और नेचुरल गैस (Natural Gas) की आपूर्ति तो रुक ही गई है। खाड़ी देशों को भारत से होने वाला चावल का निर्यात भी ठहर गया है।
करीब छह लाख टन चावल समंदर में
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया बताते हैं कि भारत से खाड़ी देशों को भेजा जाने वाला चावल का ट्रांजिट समय करीब 40 दिनों का है। इनमें भारतीय बंदरगाह पर लगने वाला समय, जहाजों पर रहने का समय और डेस्टिनेशन कंट्री के बंदरगाह पर लगने वाला समय शामिल है। अभी तो चावल का एक्सपोर्ट रुक गया है, लेकिन इससे पहले भेजा गया करीब छह लाख बासमती चावल बंदरगाह में, समंदर में या डेस्टिनेशन कंट्री के बंदरगाहों पर अटके हैं।
निर्यातकों के फंसे हजारों करोड़ रुपये
सेतिया ने बताया कि इस समय विभिन्न बंदरगाहों और समंदर में जो भारतीय बासमती चावल के कंशाइनमेंट अटके हैं, उसका वैल्यू पांच से छह हजार करोड़ रुपये है। निर्यातकों का जब इतना ज्यादा माल अटक गया है तो उन्होंने नए कंशाइनमेंट भेजने के लिए बैगिंग या पैकिंग का काम पूरी तरह से रोक दिया है। जब हालात सुधरेंगे, तब यह काम फिर से शुरू होगा।











