जेपी अस्पताल के डॉक्टर ने रिपोर्ट देने में की आनाकानी, पुलिस ने मांगी थी रिपोर्ट

जेपी अस्पताल के डॉक्टर ने रिपोर्ट देने में की आनाकानी, पुलिस ने मांगी थी रिपोर्ट

भोपाल। इसे स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का रसूख ही कहेंगे कि उनके बेटे अभिज्ञान पटेल पर धारा बढ़ाने के लिए जेपी अस्पताल के डाक्टर ने रेस्टोरेंट संचालक डेनिस मार्टिन के सिर में लगी चोट पर रिपोर्ट देने में आनाकानी कर दी। अब पुलिस हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर से राय लेकर आरोपितों पर धारा बढ़ाएगी।

उधर, जांच में लेटलतीफी और इस घटनाक्रम में लगातार किरकिरी होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने अभिज्ञान की गुंडागर्दी पर एफआईआर करने वाली शाहपुरा थाना पुलिस को पूरे मामले से हटा दिया है। अब जांच का जिम्मा टीटी नगर थाने के टीआई को सौंपा गया है।

इसके साथ ही नईदुनिया में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेकर पुलिस अब रेस्टोरेंट संचालक दंपती को सुरक्षा देने के लिए आरोपित मंत्री पुत्र और उसके छह साथियों का एक साल तक किसी प्रकार की हिंसा नहीं करने को लेकर 20 हजार रुपये का शपथ पत्र (बाउंड ओवर) लेगी।

पुलिस उपायुक्त प्रियंका शुक्ला ने बताया कि इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चार पुलिकर्मियों के निलंबन से विभाग में बढ़ते अंसतोष को शांत करने के लिए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त रश्मि अग्रवाल दुबे को जांच सौंपी गई है। इसके तहत थाने के सीसीटीवी फुटेज देखे जाएंगे, निलंबित पुलिस कर्मियों के बयान लिए जाएंगे।

बता दें कि 30 मार्च की रात करीब सवा आठ बजे मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का पुत्र अभिज्ञान पटेल अपने आधा दर्जन साथियों के साथ त्रिलंगा की तरफ जा रहा था। माखनलाल चतुर्वेदी चौराहे पर उसकी कार ने मीडियाकर्मी विवेक सिंह की बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। इसका विरोध करने पर अभिज्ञान और उसके साथियों ने उनके साथ मारपीट की। बीच-बचाव करने आए रेस्टोरेंट संचालक दंपती अलीशा सक्सेना (31) और डेनिस मार्टिन (33) के साथ भी उन्होंने मारपीट की।

बाद में अभिज्ञान ने शाहपुरा थाने में भी गुंडागर्दी कर हंगामा मचाया। मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल भी थाने पहुंचे और पुलिसकर्मियों को धमकाया। यह पूरा ड्रामा देर रात एक बजे तक चला। बाद में पुलिस ने दोनों पक्षों पर मारपीट, धमकी और गाली गलौज की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली, लेकिन रेस्टोरेंट संचालक के सिर में गंभीर चोट लगने पर हत्या के प्रयास की धारा में केस दर्ज करने की मांग की जा रही थी।

इस मामले में लापरवाही के आरोप में शाहपुरा थाने के एसआई जय सिंह, एसआई कन्हैया लाल, आरक्षक आशीष त्यागी एवं नरेश गुर्जर को निलंबित कर दिया गया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि निलंबित एसआइ कन्हैया लाल घटनाक्रम के दिन थाने में भी नहीं थे, लेकिन निलंबन में उनका नाम जोड़ दिया गया। इससे विभाग में असंतोष बढ़ रहा था।

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