ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश की सबसे बड़ी रिटेलर कंपनी ने आईपीओ की तैयारी के तौर पर अपने बैलेंस शीट को सुधारना शुरू कर दिया है। रिलायंस रिटेल की नॉन-करेंट बोरोइंग वित्त वर्ष 2025 में घटकर ₹20,464 करोड़ रह गई है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹53,546 करोड़ थी। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इसमें से रिलेटेड पार्टी लोन वित्त वर्ष 2025 में घटकर ₹5,655 करोड़ रह गए, जो FY2024 में ₹40,164 करोड़ थे। बाकी कर्ज बैंकों से लिया गया है। रिलायंस रिटेल ने ईमेल पर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
घाटे वाले स्टोर
मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि स्टोर्स का विस्तार सोच-समझकर किया जाएगा ताकि नेटवर्क मुनाफे में रहे और कंपनी का मूल्यांकन बढ़े। उन्होंने कहा कि फिलहाल, रिलायंस अपने टेलीकॉम बिजनेस के IPO पर ध्यान दे रही है, जिसकी योजना अगले साल है। उसके दो साल बाद रिटेल बिजनेस का IPO आएगा। पिछले दो वित्त वर्ष में घाटे वाले स्टोर्स को बंद करने का बड़ा काम अब पूरा हो गया है। स्टोर बंद होना जारी रहेगा, लेकिन यह सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों का हिस्सा होगा। स्टोर बंद होने के बावजूद, हर साल शुद्ध रूप से 2,000 नए स्टोर जोड़े जाएंगे।रिलायंस रिटेल की नई योजनाओं से पता चलता है कि कंपनी अब तेजी से स्टोर खोलने की गति नहीं बनाएगी। 2022 और 2023 के दौरान बहुत सारे स्टोर खोले गए थे लेकिन FY24 और FY25 में घाटे वाले स्टोर्स को बंद किया गया। सितंबर तिमाही तक कंपनी के देशभर में 19,821 आउटलेट थे। इनमें से 412 स्टोर इसी तिमाही में खोले गए थे। इस दौरान रिटेल बिजनेस के कुल राजस्व में पिछले साल के मुकाबले 18% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹90,018 करोड़ हो गया। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा 17% बढ़कर ₹3,439 करोड़ हो गया।











