हालांकि, यह बड़ा निवेश तभी होगा जब भारत सरकार वोडाफोन आइडिया की सभी देनदारियों को निपटाने के लिए एक ठोस पैकेज देगी। इसमें एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) और स्पेक्ट्रम भुगतान से जुड़े सभी बकाया शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक अगर यह डील फाइनल होती है तो TGH कंपनी के प्रमोटर बन जाएंगे और मौजूदा प्रमोटर आदित्य बिड़ला ग्रुप और यूके की वोडाफोन से नियंत्रण ले लेंगे। अभी इस टेलीकॉम कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक भारत सरकार है। भारत सरकार के पास करीब 49% हिस्सेदारी है। अगर वोडाफोन आइडिया और TGH के बीच डील हो जाती है तो भारत सरकार का भी इस पर कोई कंट्रोल नहीं रहेगा। हालांकि सरकार एक छोटी और निष्क्रिय निवेशक बनी रहेगी।
टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया को अमेरिकी कंपनी से मिल सकती है राहत
नई दिल्ली: घाटे में चल रही वोडाफोन आइडिया (Vi) को अमेरिकी कंपनी का सहारा मिल सकता है। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार अमेरिकी निवेश फर्म टिलमैन ग्लोबल होल्डिंग्स (TGH) वोडाफोन आइडिया में 4 से 6 अरब डॉलर (लगभग 35,488 से 53,232 करोड़ रुपये) का निवेश करने की सोच रही है। इतना ही नहीं, यह कंपनी इस घाटे में चल रही टेलीकॉम कंपनी का मालिकाना हक भी अपने हाथ में ले सकती है।
हालांकि, यह बड़ा निवेश तभी होगा जब भारत सरकार वोडाफोन आइडिया की सभी देनदारियों को निपटाने के लिए एक ठोस पैकेज देगी। इसमें एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) और स्पेक्ट्रम भुगतान से जुड़े सभी बकाया शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक अगर यह डील फाइनल होती है तो TGH कंपनी के प्रमोटर बन जाएंगे और मौजूदा प्रमोटर आदित्य बिड़ला ग्रुप और यूके की वोडाफोन से नियंत्रण ले लेंगे। अभी इस टेलीकॉम कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक भारत सरकार है। भारत सरकार के पास करीब 49% हिस्सेदारी है। अगर वोडाफोन आइडिया और TGH के बीच डील हो जाती है तो भारत सरकार का भी इस पर कोई कंट्रोल नहीं रहेगा। हालांकि सरकार एक छोटी और निष्क्रिय निवेशक बनी रहेगी।
इस वित्तीय वर्ष के अंत तक Vi को एक बड़े सहारे की जरूरत है, क्योंकि तब उसे AGR से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के वैधानिक बकायों का भुगतान शुरू करना होगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते Vi को कुछ राहत दी है, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि यह आदेश सभी AGR बकायों पर लागू होता है या सिर्फ लगभग 9,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग पर।
हालांकि, यह बड़ा निवेश तभी होगा जब भारत सरकार वोडाफोन आइडिया की सभी देनदारियों को निपटाने के लिए एक ठोस पैकेज देगी। इसमें एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) और स्पेक्ट्रम भुगतान से जुड़े सभी बकाया शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक अगर यह डील फाइनल होती है तो TGH कंपनी के प्रमोटर बन जाएंगे और मौजूदा प्रमोटर आदित्य बिड़ला ग्रुप और यूके की वोडाफोन से नियंत्रण ले लेंगे। अभी इस टेलीकॉम कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक भारत सरकार है। भारत सरकार के पास करीब 49% हिस्सेदारी है। अगर वोडाफोन आइडिया और TGH के बीच डील हो जाती है तो भारत सरकार का भी इस पर कोई कंट्रोल नहीं रहेगा। हालांकि सरकार एक छोटी और निष्क्रिय निवेशक बनी रहेगी।











